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मतदाता सूची में गड़बड़ी पर चुनाव आयोग सख्त, मुंबई में 30 लाख नाम हटाए गए—अब हर पात्र को जोड़ने के निर्देश

मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर मुंबई में चुनाव अधिकारियों का प्रशिक्षण हुआ। CEO बोले- कोई पात्र नागरिक नहीं छूटना चाहिए। पढ़ें पूरी खबर।

मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर अभियान को लेकर मुंबई में चुनाव अधिकारियों का एक विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। इस दौरान महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोक्कलिंगम ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि एक भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से नहीं हटना चाहिए और साथ ही एक भी अपात्र व्यक्ति का नाम सूची में शामिल नहीं होना चाहिए। विले पार्ले स्थित मास्टर दीनानाथ मंगेशकर नाट्यगृह में आयोजित इस प्रशिक्षण शिविर में मुंबई के चुनाव पंजीकरण अधिकारी यानी ईआरओ और सहायक चुनाव पंजीकरण अधिकारी यानी एईआरओ शामिल हुए। चुनाव आयोग के अनुसार, मुंबई की मूल करीब 1 करोड़ मतदाता संख्या में से 30 लाख से अधिक ऐसे मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जो या तो अब जीवित नहीं हैं या फिर किसी दूसरी जगह जाकर बस गए हैं। चोक्कलिंगम ने अधिकारियों से कहा कि किसी भी नाम को हटाने से पहले फॉर्म-7 में दी गई जानकारी की पूरी तरह से जांच की जाए। अगर कोई व्यक्ति गलत जानकारी देने की कोशिश करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जाए।

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मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने नए मतदाताओं को जोड़ने पर भी खास जोर दिया। उन्होंने कहा कि 24 अक्टूबर 2024 के बाद जो युवा 18 साल की उम्र पूरी कर चुके हैं या करने वाले हैं, उनके लिए विशेष शिविर लगाए जाएं। कॉलेज स्तर पर ही फॉर्म-6 भरने की सुविधा देकर नए मतदाताओं को सूची में शामिल किया जाए। उन्होंने यह भी साफ किया कि मतदाताओं के निवास प्रमाण की जांच पहले चरण में हो चुकी है, इसलिए अब दोबारा से निवास प्रमाण जुटाने की कोई जरूरत नहीं है। जरूरत के हिसाब से केवल नागरिकता और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच की जाए। चोक्कलिंगम ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि जांच के नाम पर किसी भी नागरिक को अनावश्यक परेशान नहीं किया जाना चाहिए। दस्तावेजों में संदेह होने की स्थिति में ही गहन जांच की जाए और जो दस्तावेज उपलब्ध हैं, उन्हीं के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाए।

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दावों और आपत्तियों की सुनवाई के दौरान संबंधित लोगों को नोटिस के साथ-साथ फोन पर भी सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर आदेश की कॉपी व्हाट्सएप पर भी भेजी जा सकती है। अगर कोई व्यक्ति खुद उपस्थित होने में असमर्थ है तो उसके रिश्तेदार को नागरिकता का प्रमाण पेश करने की अनुमति देने की बात कही गई है। अधिकारियों से कहा गया है कि अगले दो महीनों में बिना किसी दबाव या हस्तक्षेप के पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाए। चुनाव आयोग का यह अभियान मतदाता सूची को पूरी तरह से साफ और सटीक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, ताकि आगामी चुनावों में हर पात्र नागरिक को वोट डालने का अधिकार मिल सके और कोई भी गड़बड़ी न हो।

Prashant Tiwari

प्रशांत तिवारी एक अनुभवी पत्रकार हैं। वे क्राइम की खबरें लिखते हैं और डिजिटल मीडिया का काम भी करते हैं। उन्होंने दूरदर्शन न्यूज़ में डिजिटल हेड और प्राइम टीवी में डिजिटल मार्केटिंग मैनेजर के रूप में काम किया है। वे अंडरकवर रिपोर्टिंग और स्टिंग ऑपरेशन भी करते रहे हैं।

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