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CJP का ‘School Thik Karo’ अभियान: पंजाब में मिलीं आधुनिक सुविधाएं, अब गुजरात की तैयारी—जानें कहां क्या निकला

कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी का ‘School Thik Karo’ अभियान अब एक और राज्य की तरफ बढ़ता दिख रहा है। महाराष्ट्र के एक गांव से शुरू हुई यह मुहिम अब कई राज्यों के सरकारी स्कूलों तक पहुंच चुकी है। कहीं टूटे शौचालय मिले, तो कहीं बच्चों के बैठने की ठीक व्यवस्था नहीं थी। कहीं छत गिरने का खतरा दिखा, तो कहीं मिड-डे मील के राशन में कीड़े मिलने का मामला सामने आया। लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह रही कि पंजाब पहुंची सीजेपी की टीम को कुछ ऐसे स्कूल भी मिले, जहां आधुनिक सुविधाओं की जमकर तारीफ की गई। अब सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने गुजरात को लेकर ऐसा संकेत दिया है, जिससे माना जा रहा है कि अगला पड़ाव गुजरात हो सकता है। दीपके ने कहा कि जिन राज्यों को लेकर उनकी टीम पर सवाल उठाए गए, वहां वे जा चुके हैं। उन्होंने पंजाब, झारखंड और कर्नाटक का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें हैरानी है कि अब तक किसी ने गुजरात जाने के बारे में नहीं पूछा।

सीजेपी ने ‘School Thik Karo’ अभियान की शुरुआत 15 अगस्त 2026 को महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के संतुक पिंपरी गांव से की थी। अभिजीत दीपके खुद गांव के जिला परिषद स्कूल पहुंचे थे। सीजेपी के मुताबिक, उस स्कूल में शौचालय में पानी की व्यवस्था नहीं थी, खिड़कियां टूटी थीं और बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त बेंच नहीं थीं। बाद में स्कूल में मरम्मत का काम शुरू हुआ और कुछ दिनों के भीतर वहां पहली बार कंप्यूटर भी पहुंचा। इसके बाद महाराष्ट्र के लातूर जिले के औसा में एक सरकारी स्कूल का दौरा भी विवादों में रहा। दीपके ने वहां कथित तौर पर ऐसे छात्रों के मौजूद होने का सवाल उठाया जो स्कूल के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थे और परिसर में शराब की बोतलें मिलने का दावा किया। इस दौरे को लेकर बाद में उनके खिलाफ पुलिस केस भी दर्ज हुआ।

राजस्थान के जयपुर स्थित रामपुरा-कनवारपुरा सरकारी प्राथमिक स्कूल का मामला सबसे ज्यादा चर्चा में आया। स्कूल की पुरानी इमारत को असुरक्षित घोषित किया जा चुका था। रिपोर्टों के मुताबिक, वहां पढ़ने वाले करीब 18 बच्चों को वैकल्पिक जगह पर पढ़ाया जा रहा था और आसपास पशु भी रखे जाते थे। 21 अगस्त को सीजेपी की टीम, जिसमें आशुतोष रांका भी शामिल थे, स्कूल का निरीक्षण करने पहुंची। इस मामले में बाद में बड़ा प्रशासनिक कदम सामने आया। स्कूल की जर्जर इमारत को गिरा दिया गया और नई इमारत के लिए 18 लाख रुपये की व्यवस्था की गई, जिसमें 12 लाख रुपये सरकार की तरफ से और 6 लाख रुपये स्थानीय विधायक निधि से दिए गए। यानी सीजेपी के अभियान में राजस्थान वाला स्कूल ऐसा मामला बना, जहां स्कूल की हालत सामने आने के बाद वास्तविक प्रशासनिक कार्रवाई भी हुई।

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हरियाणा के भिवानी जिले के सांगवान गांव का सरकारी प्राथमिक स्कूल भी सीजेपी के अभियान के निशाने पर आया। 18 अगस्त को सीजेपी की टीम ने स्कूल का दौरा किया। टीम ने वीडियो जारी कर दावा किया कि मिड-डे मील के लिए रखे गेहूं में कीड़े थे और मूंगफली में चींटियां थीं। इसके अलावा स्कूल की दीवारों में दरारें और खराब हालत वाले शौचालय भी दिखाए गए। इसके बाद शिक्षा विभाग ने स्कूल की प्रभारी शिक्षिका को निलंबित कर दिया और दो रसोइयों को हटा दिया। मिड-डे मील प्रभारी को कारण बताओ नोटिस भी दिया गया। सितंबर में हरियाणा सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूलों की 2,814 असुरक्षित इमारतों को गिराने का आदेश भी दिया।

कर्नाटक में सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका की टीम ने बेंगलुरु के चार सरकारी स्कूलों का दौरा किया। इनमें वर्थुर का सरकारी उर्दू स्कूल भी शामिल था। सीजेपी ने दावा किया कि वहां करीब 70 फीसदी कक्षाएं छत की खराब हालत के कारण इस्तेमाल नहीं हो रही थीं। छह शिक्षकों में से केवल तीन स्थायी शिक्षक होने की बात भी सामने आई। रांका ने यह भी दावा किया कि उनकी टीम ने पिछले एक महीने में कर्नाटक के 200 से ज्यादा स्कूलों का ऑडिट किया है। वहीं पंजाब में कहानी कुछ अलग निकली। सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास की अगुवाई में टीम ने लुधियाना के तीन सरकारी स्कूलों का दौरा किया। इनमें एक स्कूल ऑफ एमिनेंस, एक सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल और एक सरकारी प्राइमरी स्कूल शामिल था। स्कूल ऑफ एमिनेंस में टीम ने स्विमिंग पूल, बैडमिंटन कोर्ट, दिव्यांगों के लिए रैंप, एआई लैब और कंप्यूटर लैब जैसी सुविधाएं देखीं। सौरव दास ने स्कूल के इंफ्रास्ट्रक्चर की तारीफ की और कहा कि कई सुविधाएं निजी स्कूलों से भी बेहतर नजर आईं।

पंजाब के दौरे के बाद आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सीजेपी की ओर से उठाए गए मुद्दों की तारीफ की और समस्याओं को दूर करने की बात कही। यहीं से सीजेपी पर सवाल भी उठने लगे कि राजस्थान और दूसरे बीजेपी शासित राज्यों में खराब स्कूलों की तस्वीरें दिखाने वाली टीम ने पंजाब में एक अच्छे स्कूल की तारीफ क्यों की। कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने इसी को लेकर सीजेपी से कहा कि पंजाब में भी वही सख्ती और उसी नजरिए से स्कूलों का ऑडिट किया जाना चाहिए। सीजेपी ने झारखंड में भी स्कूलों के सोशल ऑडिट की जानकारी दी है। अभिजीत दीपके ने खुद बाद में पंजाब, झारखंड और कर्नाटक का जिक्र करते हुए कहा कि जिन राज्यों को लेकर उनसे सवाल पूछे गए, वहां उनकी टीम पहुंची है।

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15 सितंबर को सीजेपी ने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान को उत्तर प्रदेश के नोएडा तक पहुंचाया। यहां सौरव दास की टीम ने गौतमबुद्ध नगर के गरही चौखंडी स्थित एक सरकारी प्राथमिक स्कूल का निरीक्षण किया। सीजेपी के मुताबिक, स्कूल में गंदे शौचालय, टूटे गेट, पुरानी इमारत और खराब हालत का एक पुराना कमरा मिला। टीम ने यह भी कहा कि करीब 300 बच्चों में से कुछ बच्चे उचित कक्षाओं की कमी के कारण बरामदे में पढ़ रहे थे। इसके बाद आसपास के चार और स्कूलों में टीम को प्रवेश नहीं मिला। सौरव दास ने दावा किया कि स्कूलों के गेट जानबूझकर बंद रखे गए और अधिकारियों ने शिक्षकों को सीजेपी की टीम को अंदर नहीं आने देने को कहा था। लेकिन यहां प्रशासन का पक्ष अलग है। गौतमबुद्ध नगर के बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल पंवार ने कहा कि जिले के सभी स्कूल सामान्य रूप से चल रहे हैं और स्कूल बंद करने का कोई आदेश नहीं दिया गया था। उनके मुताबिक, बड़ी भीड़ के कारण बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका थी, इसलिए सीजेपी टीम को प्रवेश नहीं दिया गया। यानी यूपी में सीजेपी के दावे और प्रशासन के जवाब के बीच साफ टकराव दिखाई दिया है।

पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में भी यह अभियान चर्चा में आया। इंदास थाना क्षेत्र के करिशुंडा गांव में सीजेपी समर्थक अब्दुल हाफिज ने अपने पुराने स्कूल की स्थिति की तस्वीरें और वीडियो बनाए थे। इसके बाद उनके और उनके पिता पर हमला किए जाने का आरोप लगा। हाफिज के पिता की बाद में मौत हो गई। सीजेपी ने इस मामले में बीजेपी कार्यकर्ताओं पर आरोप लगाया, जबकि घटना के राजनीतिक पहलू की जांच की बात पुलिस ने कही। इस अभियान में अब तक तीन नाम सबसे ज्यादा सामने आए हैं। अभिजीत दीपके सीजेपी के संस्थापक हैं, जिन्होंने महाराष्ट्र के हिंगोली में अभियान की शुरुआत की। आशुतोष रांका सीजेपी के सह-संयोजक हैं, जो राजस्थान के स्कूल दौरे में टीम के साथ रहे और बाद में बेंगलुरु में चार सरकारी स्कूलों के निरीक्षण का नेतृत्व किया। सौरव दास सीजेपी के प्रमुख प्रवक्ताओं में से एक हैं, जिन्होंने पंजाब के लुधियाना के तीन स्कूलों के दौरे में टीम का नेतृत्व किया और अब उत्तर प्रदेश के नोएडा में अभियान लेकर पहुंचे हैं। अब देखना यह है कि अभिजीत दीपके का अगला पड़ाव गुजरात बनता है या नहीं।

Prashant Tiwari

प्रशांत तिवारी एक अनुभवी ब्रॉडकास्ट जर्नलिस्ट, क्राइम इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टर और डिजिटल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट हैं। उन्होंने डीडी न्यूज़ (दूरदर्शन) में बतौर डिजिटल हेड की सेवाएं दीं और प्राइम टीवी में डिजिटल मार्केटिंग मैनेजर के रूप में न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स की डिजिटल ग्रोथ, ऑडियंस एंगेजमेंट और मल्टी-प्लेटफॉर्म मीडिया स्ट्रैटेजी पर महत्वपूर्ण काम किया। क्राइम इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के तौर पर उन्होंने कई न्यूज़ चैनलों के लिए अंडरकवर/स्पाई-स्टाइल रिपोर्टिंग, स्टिंग ऑपरेशन और फील्ड इन्वेस्टिगेशन किए। संगठित अपराध, साइबर क्राइम, ड्रग्स सिंडिकेट, मानव एवं गौवंश तस्करी और फर्जीवाड़े जैसे विषयों पर उनकी इन्वेस्टिगेशन चर्चित रहीं। कई संवेदनशील मामलों में उन्होंने क्षेत्रीय पुलिस को जरूरी इनपुट व सहयोग उपलब्ध कराया।

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