INDIA गठबंधन में सीटों की खींचतान: शिवपाल का कांग्रेस पर हमला, बोले- 2 विधायक हैं तो 150 सीटें कैसे?

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही इंडिया गठबंधन में सीटों को लेकर अंदरूनी खींचतान तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद शिवपाल सिंह पटेल के ताजा बयान ने इस खींचतान को खुलकर सामने ला दिया है। शिवपाल ने न सिर्फ कांग्रेस की 150 सीटों की मांग को अनुचित बताया, बल्कि राहुल गांधी पर अमेठी से भागने तक का आरोप लगा दिया। उनका यह बयान गठबंधन की राजनीति में एक नया मोड़ माना जा रहा है। शिवपाल ने कहा कि कांग्रेस के पास फिलहाल यूपी में सिर्फ दो विधायक हैं, जबकि सपा के पास 125 विधायक हैं। ऐसे में कांग्रेस की 150 सीटों की मांग तर्कसंगत नहीं लगती। उन्होंने कहा कि गठबंधन की भावना के खिलाफ जाकर मनमानी मांगें करना सही नहीं है।
सपा नेता ने यह भी कहा कि कांग्रेस की असल क्षमता 25 से 30 सीटों की है और उसे इसी हिसाब से मांग करनी चाहिए। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस को 17 सीटें दी गई थीं, लेकिन वह सिर्फ छह ही जीत पाई। शिवपाल ने 2017 के गठबंधन को भी याद दिलाया और कहा कि कांग्रेस के साथ जाने से सपा को नुकसान हुआ था। यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस की यूपी इकाई खुलकर 150 सीटों की मांग कर रही है। यूपी कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा था कि कांग्रेस 150 से कम सीटों पर चुनाव नहीं लड़ेगी और पार्टी के पास सभी 403 सीटों पर उम्मीदवार मौजूद हैं। उन्होंने कहा था कि सीट-बंटवारे को अक्टूबर में अंतिम रूप दिया जा सकता है।
दूसरी तरफ यूपी कांग्रेस की नई अध्यक्ष आराधना मिश्रा ने राज्य स्तर की चर्चाओं को खारिज करते हुए कहा कि सीट-बंटवारे का फैसला राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया गठबंधन का नेतृत्व करेगा। उन्होंने साफ किया कि कांग्रेस नेतृत्व ही सीटों की संख्या और गठबंधन के समय पर अंतिम फैसला लेगा। इस बीच सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने नेताओं को सख्त संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि सीट-बंटवारे और कांग्रेस को लेकर जो भी राय या चिंताएं हैं, उन्हें पार्टी के अंदर ही रखा जाए। अखिलेश का यह बयान साफ तौर पर पार्टी के भीतर अनुशासन बनाए रखने की कोशिश है, ताकि गठबंधन की बातचीत पर सार्वजनिक बयानों का असर न पड़े। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि इंडिया गठबंधन में सीटों का गणित अभी पूरी तरह से साफ नहीं हुआ है। सपा खुद को यूपी में सबसे बड़ी विपक्षी ताकत बताकर सीटों के बंटवारे में अपनी दावेदारी मजबूत करना चाहती है, जबकि कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति के आधार पर बड़ा हिस्सा मांग रही है।
2022 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो भाजपा ने 41.29 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 255 सीटें जीती थीं, सपा ने 32.06 प्रतिशत वोटों के साथ 111 सीटें, कांग्रेस ने 2.33 प्रतिशत वोटों के साथ दो सीटें और बसपा ने 12.88 प्रतिशत वोटों के साथ एक सीट जीती थी। इन आंकड़ों को देखते हुए सपा का यह तर्क मजबूत नजर आता है कि जिस पार्टी के पास सिर्फ दो विधायक हों, उसकी बड़ी सीटों की मांग कितनी जायज है। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इंडिया गठबंधन के भीतर सीटों का फॉर्मूला क्या निकलता है और क्या अखिलेश-राहुल की जोड़ी 2027 में एकजुट होकर मैदान में उतरती है या नहीं।




