उत्तर प्रदेश में 2035 तक 7.81 लाख ग्रीन रोजगार की संभावना, स्किल डेवलपमेंट पर जोर

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में ग्रीन इकोनॉमी को बढ़ावा देने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करने की बड़ी संभावनाएं हैं। सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), ग्रीन हाइड्रोजन, रीसाइक्लिंग और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में आने वाले वर्षों में रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। इसके लिए उद्योगों की जरूरतों के अनुसार युवाओं को प्रशिक्षण देना और कॉलेजों को रोजगार से जोड़ना महत्वपूर्ण होगा।
iFOREST की रिपोर्ट “Powering Uttar Pradesh’s Green Economy: Jobs, Skills and Entrepreneurship Opportunities” में राज्य के ग्रीन सेक्टर में रोजगार की संभावनाओं और कौशल विकास की जरूरतों का आकलन किया गया है।

ग्रीन सेक्टर में 7.81 लाख रोजगार की संभावना
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में वर्ष 2035 तक विभिन्न ग्रीन सेक्टरों में लगभग 7.81 लाख रोजगार और आजीविका के अवसरों की संभावना है। इनमें इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन, औपचारिक रीसाइक्लिंग और नगर निकायों के ठोस कचरे से जुड़े रोजगार शामिल हैं।
रिपोर्ट में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को रोजगार की बड़ी संभावनाओं वाले क्षेत्रों में शामिल किया गया है। इसमें इलेक्ट्रिक वाहनों की सर्विसिंग, मरम्मत और चार्जिंग से संबंधित काम महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
ये आंकड़े अध्ययन पर आधारित अनुमान हैं। वास्तविक रोजगार की संख्या निवेश, परियोजनाओं और बाजार की मांग पर निर्भर करेगी।
कंपनियों की जरूरत के अनुसार हो कौशल विकास
ग्रीन सेक्टर में रोजगार बढ़ाने के लिए केवल प्रशिक्षण देना पर्याप्त नहीं है। जरूरी है कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों को उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुसार तैयार किया जाए।
इसके लिए कंपनियों से जानकारी जुटाना जरूरी है कि उन्हें किस प्रकार के कर्मचारियों की आवश्यकता है, किन कौशलों की मांग है और आने वाले समय में कितनी भर्तियां हो सकती हैं।
दूसरी ओर, ITI, पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग कॉलेजों में उपलब्ध कोर्स, फैकल्टी, लैब और विद्यार्थियों की जानकारी भी एकत्र की जानी चाहिए। इससे प्रशिक्षण संस्थानों और उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिल सकती है।

जिला स्तर पर जॉब मैपिंग की जरूरत
रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश के लिए Labour Market Information System (LMIS) को मजबूत करने की सिफारिश की गई है। इसके माध्यम से रोजगार, प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और औद्योगिक निवेश से संबंधित जानकारी को आपस में जोड़ने पर जोर दिया गया है।
जिला स्तर पर रोजगार की मांग और प्रशिक्षण संस्थानों की क्षमता का आकलन करने से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि किस क्षेत्र में कौन-से कौशल की कमी है और किन संस्थानों में संबंधित प्रशिक्षण उपलब्ध है।
इस प्रक्रिया में कंपनियों, सरकारी विभागों, कॉलेजों और कौशल विकास से जुड़ी संस्थाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी।
ITI और पॉलिटेक्निक संस्थानों की अहम भूमिका
उत्तर प्रदेश में ITI, पॉलिटेक्निक और तकनीकी शिक्षण संस्थानों का नेटवर्क ग्रीन स्किलिंग को बढ़ाने में उपयोगी साबित हो सकता है। रिपोर्ट में मौजूदा प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने, उद्योगों से जुड़ी ट्रेनिंग बढ़ाने और अप्रेंटिसशिप के अवसरों को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है।
Solar Energy, EV सर्विसिंग, इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस, रीसाइक्लिंग और पर्यावरण प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में संबंधित पाठ्यक्रमों तथा व्यावहारिक प्रशिक्षण को उद्योगों की जरूरतों से जोड़ना आवश्यक होगा।
ग्रीन इकोनॉमी में युवाओं के लिए अवसर
उत्तर प्रदेश में ग्रीन इकोनॉमी का विस्तार रोजगार के साथ उद्यमिता के अवसर भी पैदा कर सकता है। सोलर इंस्टॉलेशन, इलेक्ट्रिक वाहन सर्विसिंग, बायोएनर्जी और वेस्ट मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में तकनीकी कौशल रखने वाले युवा नौकरी के साथ अपना व्यवसाय भी शुरू कर सकते हैं।
इसके लिए प्रशिक्षण, प्रमाणन, अप्रेंटिसशिप, वित्तीय सहायता और बाजार से जुड़ाव जैसे पहलुओं पर ध्यान देना होगा।




