SP का PDA दांव: आगामी विधानसभा चुनाव में सपा उतारेगी सिर्फ 20-22 ब्राह्मण प्रत्याशी, जानें किन सीटों पर बन रहा माहौल

आगामी विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी अपने पीडीए समीकरण के लिहाज से मात्र 20 से 22 ब्राह्मण कैंडिडेट ही उतारेगी। सूत्रों पर आधारित खबर के मुताबिक पार्टी ने ब्राह्मण समुदाय को साधने के लिए एक सधी हुई रणनीति बनाई है, जिसमें सीमित लेकिन प्रभावी सीटों पर दमदार चेहरों को मैदान में उतारा जा सकता है। अगर सरसरी नजर से देखा जाए तो अब तक जिन नामों पर चर्चा तेज है, उनमें सिद्धार्थनगर की इटवा सीट से माता प्रसाद पांडेय, कानपुर की आर्यनगर सीट से अमिताभ बाजपेई, गोरखपुर की चिल्लुपार सीट से विनय शंकर तिवारी, अयोध्या सदर से तेज नारायण पवन पांडेय, गौरीगंज या लंभुआ से संतोष पांडेय, लखनऊ उत्तरी से पूजा शुक्ला का नाम लगभग तय माना जा रहा है। इसके अलावा जलालपुर या कटेहरी से राकेश पांडेय, वाराणसी दक्षिण से किशन दीक्षित, जौनपुर की बदलापुर सीट से ओम प्रकाश उर्फ बाबा दुबे, कुशीनगर की पथरदेवा सीट से ब्रह्मशंकर त्रिपाठी, देवरिया की भाटपार रानी सीट से आशुतोष उपाध्याय, गोरखपुर शहर से शुभावती शुक्ला, बहराइच की मसही सीट से कृष्ण कुमार ओझा, सिद्धार्थनगर की बांसी सीट से मोनू दुबे, गोंडा की मेहनौंन सीट से नंदिता शुक्ला, संत कबीर नगर की मेंहदावल सीट से जयराम पांडेय तथा मिर्जापुर की मझवां सीट से रोहित शुक्ला लल्लू या सतीश मिश्रा के नाम सामने आ रहे हैं।
बाकी सीटों को समीकरण के हिसाब से तय किया जाएगा। जैसे अगर ललितेश पति त्रिपाठी चुनाव लड़ते हैं, तो मड़िहान या ज्ञानपुर सीट पर उनका टिकट फाइनल माना जा रहा है। वहीं अगर ललितेश मिर्जापुर से चुनाव लड़ते हैं, तो सतीश मिश्रा और रोहित शुक्ला को टिकट मिलना मुश्किल हो जाएगा। खबर यह भी है कि सपा के समर्थन पर ज्ञानपुर सीट से जनबली विधायक विजय मिश्रा या उनकी पत्नी चुनाव लड़ सकती हैं। बहरहाल, उत्तर प्रदेश में भाजपा और सपा ने मिलकर जातिवाद की राजनीति का जो माहौल तैयार किया है, उसमें कौन बाजी मारेगा, यह तो वक्त ही तय करेगा। फिलहाल सपा की इस रणनीति पर पूरे प्रदेश की नजर टिकी हुई है।

