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उन्नाव स्लॉटर हाउस RTI: एक साल बाद भी विभाग की चुप्पी, जानकारी नहीं मिली

उन्नाव जनपद के स्लॉटर हाउस और मीट प्रोसेसिंग इकाइयों से जुड़ी जानकारी मांगने वाली आरटीआई पर एक साल बाद भी कोई जवाब नहीं मिला। आवेदन में लाइसेंस, निरीक्षण और कार्रवाई की डिटेल मांगी गई थी। पूरा मामला।

उन्नाव जनपद में संचालित स्लॉटर हाउस और मीट प्रोसेसिंग इकाइयों से जुड़ी जानकारी मांगने वाली आरटीआई पर अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। आवेदन दाखिल हुए एक साल बीत चुका है।

3 अगस्त 2025 को नगर विकास विभाग के जरिए ऑनलाइन आरटीआई दाखिल की गई थी। पंजीकरण संख्या DOUDV/R/2025/60376 है। इसमें नगर पालिका परिषद उन्नाव के क्षेत्र में चल रही इकाइयों के लाइसेंस, निरीक्षण और कार्रवाई की विस्तृत जानकारी मांगी गई थी।

आवेदन में कई कंपनियों के नाम शामिल हैं। इनमें एम/एस इंडग्रो फूड्स लिमिटेड, एम/एस जेएस इंटरनेशनल, एम/एस रुस्तम फूड्स प्राइवेट लिमिटेड, एम/एस एओवी एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, एम/एस मैश एग्रो फूड्स लिमिटेड, स्टैंडर्ड फ्रोजन फूड एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, अशरफी फ्रोजन फूड्स एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, गोडरेज टायसन फूड्स लिमिटेड और अल-सुपर फ्रोजन फूड्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।

आरटीआई में साफ पूछा गया था कि इन इकाइयों को नगर निकाय ने लाइसेंस जारी किया है या नहीं। लाइसेंस नंबर, जारी होने की तारीख और वैधता अवधि क्या है। संचालन की शर्तें क्या हैं। नगर निकाय ने कितनी बार निरीक्षण किया। निरीक्षण रिपोर्ट की प्रमाणित कॉपी उपलब्ध कराई जाए। नियमों के उल्लंघन पर किसी यूनिट को नोटिस या जुर्माना लगा या नहीं। अगर हां तो पूरा विवरण दिया जाए।

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सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 7(1) के तहत तय समयसीमा में जवाब देना अनिवार्य है। आवेदक का कहना है कि समयसीमा बीतने के बावजूद विभाग की ओर से कोई सूचना नहीं आई।

इस चुप्पी से विभागीय कार्यप्रणाली और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्लॉटर हाउस और मीट प्रोसेसिंग इकाइयों से जुड़े लाइसेंस और निरीक्षण सार्वजनिक महत्व के विषय माने जाते हैं। ऐसे मामलों में जानकारी समय पर उपलब्ध न कराना आरटीआई अधिनियम के मकसद के खिलाफ माना जाता है।

अभी तक संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आवेदक आगे की कानूनी प्रक्रिया पर विचार कर रहा है।

Prashant Tiwari

प्रशांत तिवारी एक अनुभवी ब्रॉडकास्ट जर्नलिस्ट, क्राइम इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टर और डिजिटल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट हैं। उन्होंने डीडी न्यूज़ (दूरदर्शन) में बतौर डिजिटल हेड की सेवाएं दीं और प्राइम टीवी में डिजिटल मार्केटिंग मैनेजर के रूप में न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स की डिजिटल ग्रोथ, ऑडियंस एंगेजमेंट और मल्टी-प्लेटफॉर्म मीडिया स्ट्रैटेजी पर महत्वपूर्ण काम किया। क्राइम इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के तौर पर उन्होंने कई न्यूज़ चैनलों के लिए अंडरकवर/स्पाई-स्टाइल रिपोर्टिंग, स्टिंग ऑपरेशन और फील्ड इन्वेस्टिगेशन किए। संगठित अपराध, साइबर क्राइम, ड्रग्स सिंडिकेट, मानव एवं गौवंश तस्करी और फर्जीवाड़े जैसे विषयों पर उनकी इन्वेस्टिगेशन चर्चित रहीं। कई संवेदनशील मामलों में उन्होंने क्षेत्रीय पुलिस को जरूरी इनपुट व सहयोग उपलब्ध कराया।

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