भारत की नीली अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई रफ्तार, मछली उत्पादन से आगे बढ़कर वैल्यू एडिशन और डिजिटल मार्केटिंग पर सरकार का जोर
भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र में 39,272 करोड़ रुपये का निवेश, 46,500 सुविधाओं का विकास और 1.28 लाख से अधिक महिला लाभार्थियों को मंजूरी। जानें नीली अर्थव्यवस्था की नई तस्वीर।

नई दिल्ली : भारत का मत्स्य पालन क्षेत्र अब केवल मछली उत्पादन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि मूल्य संवर्धन, आधुनिक प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, डिजिटल मार्केटिंग और स्टार्टअप के जरिए देश की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार बनता जा रहा है। केंद्र सरकार का लक्ष्य मत्स्य क्षेत्र को तकनीक आधारित और बाजारोन्मुख उद्योग के रूप में विकसित करना है, ताकि मछुआरों और मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने के साथ-साथ रोजगार, निर्यात और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सके।
केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग के अनुसार, इस बदलाव में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), ब्लॉकचेन, ड्रोन तकनीक, स्मार्ट कोल्ड चेन और आधुनिक जलीय कृषि प्रणालियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन तकनीकों से मछली की गुणवत्ता बनाए रखने, उत्पादन की निगरानी करने, फसलोत्तर नुकसान कम करने और उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है।
सरकार ने वर्ष 2015 से अब तक मत्स्य पालन क्षेत्र के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से 39,272 करोड़ रुपये की राशि प्रतिबद्ध की है। इसमें नीली क्रांति योजना, मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास निधि (FIDF), प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY), प्रधानमंत्री मत्स्य समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY) और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) जैसी योजनाएं शामिल हैं।
इन योजनाओं का उद्देश्य मत्स्य पालन से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, आधुनिक सुविधाओं का विकास करना और देशभर के 74.66 लाख मछुआरों एवं मत्स्य पालकों की आजीविका को बेहतर बनाना है। मत्स्य उत्पादों के परिवहन, भंडारण और विपणन को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने 3,393.85 करोड़ रुपये के निवेश से 46,500 सुविधाओं का विकास किया है। इनमें मछली परिवहन वाहन, थोक एवं खुदरा मछली बाजार, फिश कियोस्क, फीड मिल, आइस प्लांट, कोल्ड स्टोरेज और मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार करने वाली इकाइयां शामिल हैं।
इसके अलावा पांच आधुनिक स्मार्ट फिश मार्केट विकसित किए जा रहे हैं। इनमें सूचना प्रौद्योगिकी, हरित तकनीक और आधुनिक लॉजिस्टिक्स प्रणाली को एकीकृत किया जा रहा है। इन बाजारों से लगभग 15,900 रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
मत्स्य क्षेत्र में मूल्य संवर्धन यानी वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके तहत मछलियों और समुद्री उत्पादों को केवल कच्चे रूप में बेचने के बजाय उनका प्रसंस्करण, पैकेजिंग और ब्रांडिंग करके बाजार में उतारा जा रहा है। अब मछली से रेडी-टू-कुक और रेडी-टू-ईट उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं को सुविधाजनक और गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पाद मिलेंगे, वहीं मछुआरों और मत्स्य पालकों को अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। वैल्यू एडिशन से मछली की भंडारण अवधि बढ़ाने, फसलोत्तर नुकसान कम करने और घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय समुद्री खाद्य उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
मत्स्य पालन क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। उद्यमी और स्टार्टअप अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, ब्लॉकचेन, ड्रोन और सटीक जलीय कृषि जैसी तकनीकों को अपना रहे हैं। इनके माध्यम से मछली पालन की निगरानी, उत्पादन की गुणवत्ता, रोग नियंत्रण, उत्पादों की ट्रैकिंग और आपूर्ति श्रृंखला को बेहतर बनाया जा रहा है। स्मार्ट कोल्ड चेन व्यवस्था से मछली को ताजा रखने और बाजार तक सुरक्षित पहुंचाने में मदद मिल रही है। सरकार का मानना है कि तकनीकी नवाचार से मत्स्य क्षेत्र अधिक लाभकारी और प्रतिस्पर्धी बन सकेगा।
उच्च गुणवत्ता वाले मत्स्य उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार मछलियों की आनुवंशिक गुणवत्ता में सुधार पर भी काम कर रही है। इसका उद्देश्य तेजी से बढ़ने वाली, रोग प्रतिरोधक क्षमता रखने वाली और अधिक उत्पादन देने वाली प्रजातियों को विकसित करना है। इस पहल के तहत ट्राउट, झींगा, कतला, रोहू, तिलापिया, पंगासियस, सीबास और स्कैम्पी जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे घरेलू बाजार के साथ-साथ प्रसंस्करण और निर्यात के लिए भी गुणवत्तापूर्ण कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ेगी। बेहतर नस्लों से मत्स्य पालकों की उत्पादकता और कमाई में वृद्धि की संभावना है।
छोटे मछुआरों और मत्स्य पालकों को बाजार से जोड़ने के लिए सरकार सामूहिक उद्यम मॉडल को प्रोत्साहित कर रही है। इसके तहत देश में 2,195 मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (FFPOs) के गठन में सहयोग दिया गया है। इन संगठनों के माध्यम से छोटे उत्पादक अपने उत्पादों को एकत्रित कर सकते हैं और प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग तथा विपणन जैसी गतिविधियों में सामूहिक रूप से भाग ले सकते हैं। कई उत्पादक संगठनों को ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) से भी जोड़ा गया है, जिससे उन्हें ऑनलाइन बाजारों तक पहुंच मिल रही है। इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री मत्स्य समृद्धि सह-योजना के तहत NCDC, NAFED, SFAC और NERAMAC जैसी एजेंसियों के सहयोग से 5,500 मत्स्य सहकारी समितियों को मजबूत किया जा रहा है, ताकि वे मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों के रूप में काम कर सकें।
मत्स्य पालन क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। विशेष रूप से मछली प्रसंस्करण, सुखाने, पैकेजिंग और खुदरा बिक्री जैसे कार्यों में महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत पिछले पांच वर्षों में 1.28 लाख से अधिक महिला लाभार्थियों के हित में 4,155 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 1,572 करोड़ रुपये है। इस सहायता से महिलाएं मछली का अचार, पापड़, स्मोक्ड फिश, मछली पाउडर और अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने के साथ-साथ पैकेजिंग एवं खुदरा कारोबार से जुड़ रही हैं। मोबाइल फिश वेंडिंग यूनिट और छोटे प्रसंस्करण उद्यमों के माध्यम से तटीय, अंतर्देशीय और पूर्वोत्तर राज्यों में महिलाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर विकसित हो रहे हैं।
मत्स्य क्षेत्र में मोबाइल मार्केटिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका भी बढ़ रही है। मोबाइल फिश वेंडिंग इकाइयों के जरिए मछली को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने में मदद मिल रही है। इससे मछुआरों और छोटे उद्यमियों को स्थानीय बाजारों में बेहतर अवसर मिल रहे हैं। साथ ही उपभोक्ताओं को ताजा, सुरक्षित और प्रोटीन से भरपूर मछली उत्पाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत हो रही है।डिजिटल कॉमर्स और आधुनिक विपणन प्रणालियां उत्पादकों और ग्राहकों के बीच दूरी कम करने में मदद कर रही हैं।
मत्स्य पालन क्षेत्र में सरकार की विभिन्न योजनाओं और निवेशों का उद्देश्य उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन और विपणन तक पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत बनाना है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, प्रधानमंत्री मत्स्य समृद्धि सह-योजना, FIDF और किसान क्रेडिट कार्ड जैसी पहलों के माध्यम से इस क्षेत्र में बुनियादी ढांचे और उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार का जोर केवल अधिक मछली उत्पादन पर नहीं, बल्कि उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाने, फसलोत्तर नुकसान कम करने, निर्यात को प्रोत्साहित करने और मछुआरों की आय में वृद्धि करने पर है। इस बदलाव से महिला उद्यमियों, युवाओं, सहकारी समितियों और छोटे व्यवसायों के लिए भी नए अवसर पैदा होंगे। कुल मिलाकर, तकनीक, मूल्य संवर्धन और डिजिटल मार्केटिंग के जरिए भारत का मत्स्य पालन क्षेत्र उच्च मूल्य वाली नीली अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।




