राष्ट्रपति ने 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के विजेताओं को दिए ललित कला अकादमी पुरस्कार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के चयनित कलाकारों को ललित कला अकादमी पुरस्कार प्रदान किए। उन्होंने युवा कलाकारों को अवसर, आर्थिक सहयोग और बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

नई दिल्ली : भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को नई दिल्ली में 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के चयनित कलाकारों को ललित कला अकादमी पुरस्कार प्रदान किए। इस अवसर पर उन्होंने तृतीय प्रिंट द्विवार्षिकी भारत, 2026 के ग्रैंड प्राइज विजेताओं और सम्माननीय उल्लेख प्राप्त करने वाले कलाकारों को भी सम्मानित किया।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि यह समारोह भारत की समृद्ध कलात्मक विरासत, सांस्कृतिक विविधता और समकालीन सृजनशीलता का उत्सव है। उन्होंने जोर दिया कि युवा और उभरते कलाकारों को अपनी प्रतिभा निखारने, नए कला माध्यम अपनाने और रचनात्मकता का विस्तार करने के लिए पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि कला केवल कैनवास पर बनाई गई आकृतियों, पत्थर पर तराशी गई मूर्तियों या विभिन्न माध्यमों से तैयार कलाकृतियों तक सीमित नहीं है। यह हमारी संस्कृति का दर्पण है, जिसमें अतीत की स्मृतियां, वर्तमान के अनुभव और भविष्य की आकांक्षाएं दिखाई देती हैं। उन्होंने कहा कि कला लोगों को अपने समय और समाज को नए दृष्टिकोण से देखने तथा समझने का अवसर प्रदान करती है। भारत की विविध कलात्मक परंपराएं देश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करती हैं और पीढ़ियों के बीच ज्ञान तथा अनुभवों के आदान-प्रदान का माध्यम बनती हैं।
राष्ट्रपति ने दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले पारंपरिक कलाकारों को नई तकनीकों और समकालीन कला शैलियों का प्रशिक्षण देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों से कलाकार अपनी प्रतिभा को और विकसित कर सकेंगे तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के व्यापक मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन करने के बेहतर अवसर प्राप्त कर सकेंगे। पारंपरिक कला को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने से कलाकारों को बदलते समय के अनुरूप अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति विकसित करने में भी मदद मिलेगी।
राष्ट्रपति ने कहा कि कलाकारों को केवल रचनात्मक अवसर देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें आर्थिक सहयोग और अपनी कलाकृतियों के लिए व्यापक बाजार तक पहुंच भी उपलब्ध करानी चाहिए। उन्होंने कला-संग्राहकों से कलाकारों को जोड़ने और उनकी कृतियों की बिक्री को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया। राष्ट्रपति ने इस दिशा में ललित कला अकादमी और संस्कृति मंत्रालय की ओर से किए जा रहे प्रयासों पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कला क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए ऐसे अवसर जरूरी हैं, जिनसे कलाकार अपनी रचनात्मकता के साथ आर्थिक रूप से भी आत्मनिर्भर बन सकें।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि कला केवल कला दीर्घाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसे विद्यालयों, विश्वविद्यालयों, सार्वजनिक स्थलों और समाज के व्यापक वर्गों तक पहुंचाया जाना चाहिए। उन्होंने सभी संबंधित हितधारकों से आग्रह किया कि वे युवा और उभरते कलाकारों को अपनी प्रतिभा विकसित करने, नए माध्यमों के साथ प्रयोग करने और अपनी सृजनशीलता का विस्तार करने के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराएं।उनके अनुसार, कला तक व्यापक जनभागीदारी और पहुंच बढ़ने से समाज में रचनात्मकता, सांस्कृतिक समझ और कलात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहन मिलेगा।
65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी भारतीय कलाकारों की रचनात्मक प्रतिभा और देश की विविध कलात्मक परंपराओं को सामने लाने वाला महत्वपूर्ण आयोजन है। ललित कला अकादमी पुरस्कारों के माध्यम से चयनित कलाकारों के योगदान को पहचान और सम्मान दिया जाता है।
वहीं, तृतीय प्रिंट द्विवार्षिकी भारत, 2026 के विजेताओं को सम्मानित करना प्रिंटमेकिंग सहित विभिन्न कला माध्यमों में उत्कृष्ट सृजनशीलता को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का संदेश स्पष्ट है कि भारत की कला और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ कलाकारों को आधुनिक प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता और बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराना भी जरूरी है। युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और कला को आम लोगों तक पहुंचाने से देश का रचनात्मक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र और मजबूत हो सकता है।




