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पश्चिम एशिया संकट का असर : हीलियम, एल्युमीनियम से लेकर मेडिकल उपकरण पर भी असर

अमरेश द्विवेदी, विशेष संवाददाता, नई दिल्ली

पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे तनाव और युद्ध जैसी स्थिति को शांत करने के लिए किए जा रहे सीजफायर प्रयासों में अभी भी बड़ा गतिरोध बना हुआ है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देशों के बीच बातचीत तो चल रही है, लेकिन कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन पा रही है। स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञ इसे “स्टैंडस्टिल” यानी ठहराव की स्थिति बता रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मध्यस्थ देशों (जैसे पाकिस्तान, तुर्किये और मिस्र) की कोशिशों से अमेरिका और ईरान के बीच एक अस्थायी सीजफायर प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें 45 दिन के युद्धविराम और रणनीतिक समुद्री रास्ते (जैसे होर्मुज जलडमरूमध्य) खोलने की बात शामिल थी।

हालांकि, ईरान ने इससे पहले कई छोटे और अस्थायी सीजफायर प्रस्तावों को भी खारिज कर दिया है और कहा है कि वह केवल दीर्घकालिक और ठोस समझौते पर ही बात करेगा।

इस संघर्ष का असर केवल राजनीतिक नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन पर भी गहराता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान से जुड़े तनाव के कारण तेल और गैस बाजार पहले ही प्रभावित हैं, लेकिन अब इसका असर कई महत्वपूर्ण औद्योगिक संसाधनों पर भी पड़ने लगा है।

ईरान से जुड़े तनाव और क्षेत्रीय संघर्ष के कारण खाड़ी क्षेत्र में उत्पादन और सप्लाई प्रभावित हो रही है। इसका सीधा असर हीलियम की आपूर्ति पर देखा जा रहा है।

कतर, जो दुनिया के सबसे बड़े हीलियम उत्पादकों में से एक है, ने कुछ औद्योगिक घटनाओं और हमलों के बाद उत्पादन में अस्थायी रोक की घोषणा की है। इससे वैश्विक हीलियम सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

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हीलियम प्राकृतिक गैस प्रोसेसिंग का एक महत्वपूर्ण बाय-प्रोडक्ट है और इसका उपयोग कई अत्याधुनिक क्षेत्रों में होता है, जैसे – सेमीकंडक्टर चिप निर्माण, मेडिकल उपकरण (एमआरआई मशीन), स्पेस टेक्नोलॉजी और रॉकेट लॉन्चिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स कूलिंग सिस्टम आदि।

विशेषज्ञों का मानना है कि हीलियम की कमी से चिप निर्माण उद्योग प्रभावित हो सकता है, जिससे स्मार्टफोन, लैपटॉप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों की प्रगति धीमी पड़ सकती है।

इसके अलावा एल्युमीनियम सप्लाई पर भी दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। खाड़ी देशों का वैश्विक एल्युमीनियम उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान है और किसी भी प्रकार की रुकावट से इसकी कीमतों में वृद्धि हो सकती है। एल्युमीनियम का उपयोग बड़े पैमाने पर पैकेजिंग, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और निर्माण उद्योग में होता है। सप्लाई बाधित होने से इन सभी क्षेत्रों में लागत बढ़ सकती है और उपभोक्ताओं पर इसका असर पड़ सकता है।

तेल और गैस आपूर्ति में पहले से ही अस्थिरता बनी हुई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित है। गैसोलीन और ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो यह वैश्विक मुद्रास्फीति को और बढ़ा सकता है।

सेमीकंडक्टर और एआई इंडस्ट्री पहले से ही सप्लाई चेन चुनौतियों का सामना कर रही है। हीलियम और अन्य दुर्लभ गैसों की कमी से चिप निर्माण की गति धीमी हो सकती है। इसका असर सीधे तौर पर स्मार्टफोन निर्माण, इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

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विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्थिति जल्दी नहीं सुधरी, तो कई कंपनियों को अपने उत्पादन लक्ष्य में देरी करनी पड़ सकती है।

हीलियम की कमी का असर मेडिकल सेक्टर पर भी पड़ सकता है, क्योंकि एमआरआई मशीनों और अन्य हाई-टेक मेडिकल उपकरणों में इसका उपयोग जरूरी होता है। इसके अलावा स्पेस इंडस्ट्री में रॉकेट फ्यूल टैंक की सफाई और लॉन्चिंग प्रक्रियाओं में भी हीलियम का उपयोग होता है।

स्पेस कंपनियों के बढ़ते लॉन्च कार्यक्रमों के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे कमी की स्थिति और गंभीर हो सकती है।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में यह तनाव लंबे समय तक चलता है, तो इसका असर केवल ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह वैश्विक सप्लाई चेन को गहराई से प्रभावित करेगा। उनका कहना है कि कई कंपनियां पहले से ही संभावित कमी और कीमतों में वृद्धि को देखते हुए अपने प्रोडक्शन प्लान में बदलाव कर रही हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर वार्ता फिलहाल ठहराव की स्थिति में है। दोनों देशों के बीच राजनीतिक और रणनीतिक मतभेद अब तक दूर नहीं हो पाए हैं। इस बीच वैश्विक स्तर पर ऊर्जा, हीलियम, एल्युमीनियम और हाई-टेक उद्योगों पर असर बढ़ने की आशंका है।

स्थिति अगर जल्द नहीं सुधरी, तो इसका प्रभाव आने वाले महीनों में वैश्विक अर्थव्यवस्था, उद्योग और आम उपभोक्ताओं तक महसूस किया जाएगा।

Prashant Tiwari

प्रशांत तिवारी एक अनुभवी ब्रॉडकास्ट जर्नलिस्ट, क्राइम इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टर और डिजिटल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट हैं। उन्होंने डीडी न्यूज़ (दूरदर्शन) में बतौर डिजिटल हेड की सेवाएं दीं और प्राइम टीवी में डिजिटल मार्केटिंग मैनेजर के रूप में न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स की डिजिटल ग्रोथ, ऑडियंस एंगेजमेंट और मल्टी-प्लेटफॉर्म मीडिया स्ट्रैटेजी पर महत्वपूर्ण काम किया। क्राइम इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के तौर पर उन्होंने कई न्यूज़ चैनलों के लिए अंडरकवर/स्पाई-स्टाइल रिपोर्टिंग, स्टिंग ऑपरेशन और फील्ड इन्वेस्टिगेशन किए। संगठित अपराध, साइबर क्राइम, ड्रग्स सिंडिकेट, मानव एवं गौवंश तस्करी और फर्जीवाड़े जैसे विषयों पर उनकी इन्वेस्टिगेशन चर्चित रहीं। कई संवेदनशील मामलों में उन्होंने क्षेत्रीय पुलिस को जरूरी इनपुट व सहयोग उपलब्ध कराया।

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