उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने महापर्व क्षमापना समारोह में दिया क्षमा, अहिंसा और सद्भाव का संदेश
उपराष्ट्रपति बोले—“क्षमा का अर्थ बदले के बजाय सुधार, घृणा के बजाय संवाद और शत्रुता के बजाय मेल-मिलाप चुनना है”

उपराष्ट्रपति ने कहा कि जैन परंपरा ने क्षमा को जिस गहराई से आध्यात्मिक अनुशासन का स्वरूप दिया है, वह आज भारत ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि क्षमापना केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानव हृदय में परिवर्तन का अवसर है।
क्षमापना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि क्षमा का अर्थ अन्याय को स्वीकार करना या सत्य से समझौता करना नहीं है। उन्होंने कहा, “क्षमा का अर्थ बदले के बजाय सुधार, घृणा के बजाय संवाद और शत्रुता के बजाय मेल-मिलाप चुनना है।”
उन्होंने कहा कि प्रतिक्रमण की भावना व्यक्ति और परिवारों को अपनी गलतियों को स्वीकार करने, आत्ममंथन करने और आपसी विवादों को दूर करने की प्रेरणा दे सकती है।
जैन दर्शन के सार्वभौमिक संदेश का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सभी जीवों के प्रति मैत्री और किसी के प्रति शत्रुता न रखने का सिद्धांत भारत की सभ्यतागत भावना “वसुधैव कुटुम्बकम्” से गहराई से जुड़ा है।
उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष और हिंसा देखने को मिल रही है, भगवान महावीर की शिक्षाएं शांति, संवाद, सह-अस्तित्व और करुणा का रास्ता दिखा सकती हैं।
सीपी राधाकृष्णन ने तमिलनाडु और जैन धर्म के बीच ऐतिहासिक संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जैन धर्म ने तमिल साहित्य और संस्कृति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। जैन विद्वानों और साधुओं के योगदान के साथ-साथ तमिलनाडु में मौजूद प्राचीन जैन मंदिरों और शिक्षा केंद्रों का भी उन्होंने उल्लेख किया।

विकसित भारत @ 2047 के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकास का अर्थ केवल आर्थिक समृद्धि, आधुनिक बुनियादी ढांचे और तकनीकी प्रगति तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक वास्तविक विकसित भारत में नागरिकों के बीच विश्वास, परिवारों में मूल्य, युवाओं में चरित्र और समाज में करुणा भी होनी चाहिए। उन्होंने इसे “विकास भी, विरासत भी” की भावना से जोड़ते हुए लोगों से विनम्रता, करुणा, सेवा, एकता और जिम्मेदारी के मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया।
समारोह के दौरान उपराष्ट्रपति ने केसी जैन को जैन समाज रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया।
कार्यक्रम में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया, भगवान महावीर मेमोरियल कमेटी के अध्यक्ष कन्हैया लाल जैन, जैन महासभा दिल्ली के अध्यक्ष दिनेश दोशी, आचार्य श्री विशुद्ध सागरजी मुनिराज सहित जैन समाज के अनेक संत, पदाधिकारी और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।


