सीसीपीए की वॉकी-टॉकी कंपनियों पर बड़ी कार्रवाई, होगर टेक्नोलॉजीज पर ₹1 लाख का जुर्माना
सीसीपीए ने वॉकी-टॉकी के भ्रामक विज्ञापनों के लिए होगर टेक्नोलॉजीज पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया है। नियमों का पालन न करने वाली 16,970 से अधिक लिस्टिंग की पहचान की गई है और 12 इकाइयों पर कुल ₹58 लाख का जुर्माना लगाया गया है।

नई दिल्ली : केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने वॉकी-टॉकी के भ्रामक विज्ञापनों और नियामकीय नियमों का पालन नहीं करने वाली उत्पाद प्रविष्टियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। प्राधिकरण ने होगर टेक्नोलॉजीज एंड इनोवेशन एलएलपी पर भ्रामक विज्ञापन देने और जरूरी नियामकीय जानकारी स्पष्ट नहीं करने के मामले में ₹1 लाख का जुर्माना लगाया है। सीसीपीए के अनुसार, विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर वॉकी-टॉकी की 16,970 से अधिक गैर-अनुपालन वाली उत्पाद प्रविष्टियां पाई गईं। इस मामले में 13 ई-कॉमर्स कंपनियों को नोटिस जारी किए गए हैं।
सीसीपीए ने होगर टेक्नोलॉजीज एंड इनोवेशन एलएलपी की वेबसाइट पर उपलब्ध वॉकी-टॉकी के विभिन्न मॉडलों के विज्ञापनों और उत्पाद विवरणों की जांच की। जांच में पाया गया कि उत्पादों की परिचालन आवृत्ति, लाइसेंस की आवश्यकता और संबंधित नियामकीय मंजूरियों के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी।
प्राधिकरण के मुताबिक, ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी का अभाव उपभोक्ताओं को यह गलत धारणा दे सकता है कि इन उपकरणों का इस्तेमाल बिना किसी अतिरिक्त सरकारी अनुमति के किया जा सकता है। इससे उपभोक्ता गलत जानकारी के आधार पर खरीदारी का निर्णय ले सकते हैं और उन्हें कानूनी या आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
यह कार्रवाई उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत की गई है। सीसीपीए की अध्यक्षता मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्रा कर रहे हैं।
सीसीपीए ने स्पष्ट किया कि ‘लो पावर और वैरी लो पावर वाले शॉर्ट-रेंज रेडियो फ्रीक्वेंसी उपकरण (लाइसेंस की आवश्यकता से छूट) नियम, 2018’ के तहत 446.0–446.2 मेगाहर्ट्ज (MHz) की निर्धारित आवृत्ति सीमा में काम करने वाले व्यक्तिगत मोबाइल रेडियो उपकरणों को निर्धारित शर्तों के अधीन लाइसेंस से छूट मिल सकती है।
हालांकि, इस निर्धारित आवृत्ति सीमा के बाहर काम करने वाले वायरलेस रेडियो उपकरणों पर संबंधित नियामकीय नियम लागू होते हैं। इसलिए, विज्ञापन और उत्पाद विवरण में उपकरण की परिचालन आवृत्ति तथा लागू लाइसेंस और मंजूरी संबंधी शर्तों की जानकारी देना जरूरी है।
कार्रवाई के दौरान होगर टेक्नोलॉजीज ने दावा किया कि उसके पास वैध डीलर पजेसिंग लाइसेंस (डीपीएल) है और उसके उपकरण इक्विपमेंट टाइप अप्रूवल (ईटीए) प्रमाणन के दायरे में आते हैं। कंपनी ने यह भी कहा कि उसकी वेबसाइट का उद्देश्य मुख्य रूप से उत्पादों की जानकारी देना और संभावित ग्राहकों तक पहुंचना है, न कि सीधे ऑनलाइन बिक्री करना।
हालांकि, सीसीपीए ने स्पष्ट किया कि नियामकीय लाइसेंस और प्रमाणन होने से विज्ञापनदाता की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। कंपनियों को उपभोक्ताओं को खरीदारी से पहले सटीक, पूर्ण और महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करानी ही होगी।
प्राधिकरण ने यह भी कहा कि वेबसाइट पर शॉपिंग कार्ट या ऑनलाइन भुगतान की सुविधा नहीं होने के बावजूद उत्पादों का प्रचार उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत भ्रामक विज्ञापन के दायरे में आ सकता है।
सीसीपीए ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर वॉकी-टॉकी की बड़े पैमाने पर बिक्री और उत्पाद प्रविष्टियों में आवश्यक नियामकीय जानकारी की कमी का स्वतः संज्ञान लिया था। जांच में 16,970 से अधिक गैर-अनुपालन वाली प्रविष्टियों की पहचान की गई।
इसके बाद अमेजन, फ्लिपकार्ट, मीशो, मेटा (फेसबुक मार्केटप्लेस), जियोमार्ट, इंडियामार्ट और ट्रेडइंडिया समेत 13 ई-कॉमर्स कंपनियों को नोटिस जारी किए गए। प्राधिकरण अब तक 12 संस्थाओं के खिलाफ अंतिम आदेश पारित कर चुका है। इन मामलों में कुल ₹58 लाख का जुर्माना लगाया गया है।
प्रमुख कंपनियों पर लगाए गए अमेजन सेलर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, फ्लिपकार्ट इंटरनेट प्राइवेट लिमिटेड, मीशो प्राइवेट लिमिटेड, मेटा प्लेटफॉर्म्स और ट्रेडइंडिया (इन्फोकॉम नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड) प्रत्येक पर ₹10 लाख का जुर्माना लगाया गया हैं।
जियोमार्ट (रिलायंस रिटेल लिमिटेड), चिमिया, मास्कमैन टॉयज, टॉक प्रो (आइकॉनेट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड), संचार वायरलेस कम्युनिकेशंस लिमिटेड, अंतरिक्ष टेक्नोसिस प्राइवेट लिमिटेड और होगर टेक्नोलॉजीज एंड इनोवेशन एलएलपी प्रत्येक पर एक लाख क ाजुर्माना लगाया गया हैं।
वहीं, सीसीपीए की कार्रवाई के खिलाफ कुछ कंपनियों ने न्यायिक मंचों का रुख किया है। अमेजन सेलर सर्विसेज और फ्लिपकार्ट इंटरनेट ने कर्नाटक उच्च न्यायालय में प्राधिकरण के आदेशों को चुनौती दी है।
मेटा प्लेटफॉर्म्स और ट्रेडइंडिया ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) में अपील की है। ट्रेडइंडिया के मामले में आयोग ने कंपनी को जुर्माने की राशि जमा करने का निर्देश दिया है। इंडियामार्ट इंटरमेश लिमिटेड ने भी सीसीपीए की कार्यवाही को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया है। संबंधित मामले की कार्यवाही प्राधिकरण के स्तर पर भी विचाराधीन बताई गई है।
सीसीपीए ने कहा है कि वॉकी-टॉकी जैसे वायरलेस उपकरणों की ऑनलाइन लिस्टिंग और विज्ञापनों में परिचालन आवृत्ति, लाइसेंस की शर्तों और अन्य जरूरी नियामकीय जानकारियों का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। इस कार्रवाई का उद्देश्य उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले विज्ञापनों पर रोक लगाना, पारदर्शिता बढ़ाना और अनुचित व्यापार प्रथाओं के खिलाफ कार्रवाई करना है। प्राधिकरण ने कारोबारियों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को नियामकीय अनुपालन सुनिश्चित करने तथा उपभोक्ताओं को सही जानकारी देने की जिम्मेदारी निभाने पर जोर दिया है।



