Arshad Madani Saharanpur: मस्जिदें गिराने वाले आज सत्ता में हैं, कल नहीं रहेंगे—इस्लाम को कोई नहीं मिटा सकता

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में दारुल उलूम देवबंद परिसर में राब्ता-ए-मदारिस इस्लामिया का सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें मौलाना अरशद मदनी ने शिरकत की। Arshad Madani Saharanpur ने इस सम्मेलन को संबोधित करते हुए देश में कथित तौर पर बढ़ती सांप्रदायिकता और मस्जिदों, मदरसों तथा अन्य धार्मिक संस्थानों को निशाना बनाए जाने पर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा दौर में मुसलमानों के साथ-साथ उनके धर्म, संस्कृति, पहचान और धार्मिक संस्थानों को भी निशाना बनाया जा रहा है। Arshad Madani Saharanpur ने कहा कि जो लोग आज मस्जिदों को शहीद कर रहे हैं और इस्लाम की पहचान मिटाने का सपना देख रहे हैं, उन्हें समझ लेना चाहिए कि जो आज सत्ता में हैं, वे कल नहीं रहेंगे।
उन्होंने कहा कि सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन इस्लाम को न तो पहले कोई ताकत मिटा सकी और न ही भविष्य में कोई मिटा पाएगा। Arshad Madani Saharanpur ने पूर्व सोवियत संघ का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां लंबे समय तक धार्मिक गतिविधियों और इस्लाम के प्रतीकों को दबाने की कोशिश की गई, लेकिन मुसलमानों के दिलों से ईमान खत्म नहीं किया जा सका। उन्होंने कहा कि सोवियत संघ के विघटन के बाद उससे आजाद हुए कई देशों में आज मस्जिदें आबाद हैं और अजान दी जाती है। मदनी ने कहा कि उनका धार्मिक विश्वास है कि एक बार जहां मस्जिद बन जाती है, उसकी इमारत गिराए जाने के बावजूद उसकी मजहबी हैसियत खत्म नहीं होती। Arshad Madani Saharanpur ने मुसलमानों से अपील की कि वे मौजूदा परिस्थितियों से निराश होने के बजाय सब्र, हौसले और दृढ़ता के साथ आगे बढ़ें, क्योंकि मुसलमानों का इतिहास सब्र, कुर्बानी और हौसले का रहा है। इस सम्मेलन में देशभर के करीब पांच हजार मदरसों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
Arshad Madani Saharanpur ने नई पीढ़ी की धार्मिक और नैतिक शिक्षा की जिम्मेदारी केवल मदरसों पर छोड़ने के बजाय माता-पिता से भी बच्चों के चरित्र, आस्था और नैतिक मूल्यों पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि मदरसों को धार्मिक शिक्षा के साथ विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण और वैचारिक प्रशिक्षण के लिए भी प्रभावी व्यवस्था बनानी चाहिए। मदनी ने मदरसों के खिलाफ चलाए जा रहे कथित नकारात्मक अभियान की आलोचना करते हुए कहा कि इन संस्थानों ने देश की आजादी, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने दारुल उलूम देवबंद के योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि इसके विद्वानों ने स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया और देश की आजादी के लिए कुर्बानियां दीं। Arshad Madani Saharanpur ने कौम से एकता बनाए रखने, धार्मिक एवं शैक्षिक संस्थानों को मजबूत करने और नई पीढ़ी को नेक परवरिश देने पर ध्यान देने की अपील की। उनका यह पूरा बयान Arshad Madani Saharanpur के सम्मेलन में दिए गए संबोधन का हिस्सा है, जिसे अब देश भर में खासा महत्व दिया जा रहा है।



