भारत आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त सुरक्षा मजबूत करने को तैयार, राजनाथ सिंह ने एडीएमएम-प्लस में दिया सहयोग का संदेश
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फिलीपींस के सेबू में आयोजित एडीएमएम-प्लस 2026 में आतंकवाद का मुकाबला करने, हिंद-प्रशांत सुरक्षा, समुद्री सहयोग और 'डिफेंस यूथ ब्रिज' (रक्षा युवा सेतु) के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।

सेबू, फिलीपींस : भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के सभी रूपों के उन्मूलन और सामूहिक क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई है। फिलीपींस के सेबू में आयोजित 13वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद-रोधी अभियानों में अपने धरातल पर परखे गए अनुभवों को साझेदार देशों के साथ साझा करने के लिए तैयार है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत का आतंकवाद-रोधी अनुभव केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि दशकों तक सीमा पार की जटिल सुरक्षा चुनौतियों का सामना करके अर्जित किया गया है। संयुक्त सैन्य अभ्यास, क्षमता निर्माण कार्यक्रम और खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अभियान ने भारत के सक्रिय और धरातल पर परखे गए सुरक्षा सिद्धांत को निर्णायक रूप से प्रदर्शित किया। उनके अनुसार, भारत ने आतंकवादी ढांचे के खिलाफ कार्रवाई करते हुए राज्य प्रायोजित आतंकवाद के प्रति अपनी स्पष्ट नीति को सामने रखा।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद की कोई सीमा नहीं होती। इसलिए इस चुनौती से निपटने के लिए देशों के बीच सहयोग, बेहतर समन्वय और व्यावहारिक अनुभव साझा करना आवश्यक है।
भारत और मलेशिया वर्ष 2024 से 2027 तक ADMM-Plus के आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्य समूह की सह-अध्यक्षता कर रहे हैं। यह पहल क्षेत्रीय स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ साझा प्रयासों को बढ़ावा देने में अहम है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत आसियान की केंद्रीय भूमिका और स्वतंत्र, समावेशी, सुरक्षित तथा नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र को विशेष महत्व देता है। भारत की आसियान नीति साझा हितों, पारस्परिक सम्मान और व्यावहारिक सहयोग पर आधारित है।
उन्होंने पिछले वर्ष कुआलालंपुर में आयोजित दूसरी आसियान-भारत रक्षा मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक का भी उल्लेख किया। इस दौरान आसियान-भारत व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने और 2026 से 2030 की कार्ययोजना के तहत रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई थी।
इस वर्ष ADMM-Plus की थीम ‘Navigating Our Future, Together’ है। राजनाथ सिंह ने कहा कि यह विषय भारत की विदेश और रक्षा नीति के साथ-साथ उसकी सभ्यतागत भावना ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के अनुरूप है, जो सभी के सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना करती है।
राजनाथ सिंह ने वर्ष 2026 को ‘आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष’ घोषित किए जाने और दूसरे आसियान-भारत समुद्री अभ्यास का उल्लेख करते हुए समुद्री सुरक्षा को क्षेत्रीय समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का पालन करने और नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारतीय नौसेना वर्ष 2008 से अदन की खाड़ी जैसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में सक्रिय भूमिका निभा रही है।
रक्षा मंत्री के अनुसार, भारतीय नौसेना ने अग्रिम पंक्ति के युद्धपोत तैनात करके हजारों वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराया है और समुद्र में जहाजों के अपहरण की कई घटनाओं को विफल करने में योगदान दिया है। भारत की समुद्री सुरक्षा गतिविधियां जहाजों की राष्ट्रीयता या ध्वज से परे वाणिज्यिक नौवहन की सुरक्षा पर केंद्रित हैं।
उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार मार्गों को सीमा पार के जटिल खतरों से बचाने के लिए केवल बयान देना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए निरंतर परिचालन उपस्थिति, ठोस कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है। भारत हिंद महासागर और व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक विश्वसनीय शुद्ध सुरक्षा प्रदाता के रूप में अपनी भूमिका निभाता रहेगा।
रक्षा मंत्री ने समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCLOS) और नौवहन एवं विमानों की उड़ान की स्वतंत्रता के प्रति भारत के समर्थन को दोहराया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून के शासन पर भारत का जोर किसी देश के खिलाफ नहीं है। इसका उद्देश्य उन सभी क्षेत्रीय हितधारकों के साझा हितों की रक्षा करना है, जो खुले समुद्री मार्गों और स्थिर समुद्री व्यवस्था पर निर्भर हैं।
भारत समुद्री सुरक्षा, खोज एवं बचाव अभियान, मानवीय सहायता, पेशेवर संवाद, क्षमता निर्माण और अंतरराष्ट्रीय कानून के क्षेत्र में आसियान साझेदारों के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार है।
राजनाथ सिंह ने भारत और आसियान देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने में युवाओं की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में एक समर्पित ‘यूथ ब्रिज’ स्थापित करने का प्रस्ताव रखा।
इस पहल का उद्देश्य संस्थागत स्तर पर युवाओं के बीच संपर्क बढ़ाना, डिजिटल नवाचार को प्रोत्साहित करना और ADMM-Plus की पहलों के अनुरूप क्षमता निर्माण को सुविधाजनक बनाना है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत और आसियान की युवा आबादी की समान आकांक्षाएं क्षेत्रीय साझेदारी को और गहरा करने का अवसर प्रदान करती हैं। युवाओं को क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा में योगदान देने के अधिक अवसर उपलब्ध कराना एक शांतिपूर्ण, मजबूत और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के निर्माण के लिए आवश्यक है।



