Monsoon Return: यूपी से लौटा मानसून, फिर भी क्यों उफान पर हैं नदियां? जानें बाढ़ बढ़ने की 2 बड़ी वजहें

उत्तर प्रदेश में मानसून की विदाई हो चुकी है, लेकिन बाढ़ का संकट कम होने का नाम नहीं ले रहा। मौसम विभाग के मुताबिक दक्षिण पश्चिम मानसून इस बार तय समय से दो दिन पहले यानी 3 अक्टूबर को ही यूपी से वापस लौट गया। मानसून ने इस साल 12 दिन की देरी से 30 जून को प्रदेश में एंट्री की थी। इस हिसाब से मानसून यूपी में कुल 95 दिनों तक सक्रिय रहा। लेकिन बारिश रुकने के बाद भी नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। प्रदेश के 11 जिलों में 10 नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक बारिश बंद होने के बाद भी बाढ़ बढ़ने की दो बड़ी वजहें हैं। पहली वजह यह है कि ऊपरी इलाकों में बारिश का पानी नीचे आ रहा है। नेपाल, उत्तराखंड और यूपी के ऊपरी जिलों में हुई तेज बारिश का पानी नदियों के रास्ते मैदानी इलाकों में पहुंच रहा है। इसी वजह से लखनऊ, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, बहराइच, श्रावस्ती, सीतापुर, गोंडा और बाराबंकी जैसे जिलों में हालात बिगड़ रहे हैं। दूसरी बड़ी वजह बैराज और बांधों से छोड़ा जा रहा अतिरिक्त पानी है। ऊपरी इलाकों में बारिश के चलते बैराज और जलाशयों का जलस्तर बढ़ जाता है, जिसके बाद जरूरत पड़ने पर पानी छोड़ा जाता है। यह पानी कुछ समय बाद यूपी की नदियों में पहुंचता है और जलस्तर बढ़ा देता है।
इसका सीधा असर अयोध्या, गोरखपुर और लखनऊ जैसे मैदानी जिलों में देखने को मिल रहा है। लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से 40 हजार से ज्यादा घरों में पानी घुस गया है और करीब 10 हजार लोगों को सुरक्षित जगहों पर पलायन करना पड़ा है। गोमती रिवर फ्रंट को अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है। लखीमपुर खीरी में शारदा नदी का कटान तेज हो गया है, जिससे कई पेड़ और मकान नदी में समा गए। एक गांव में बाघ घुस आया, जिससे दहशत फैल गई। उन्नाव में गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी के चलते चंपापुरवा गांव में मगरमच्छ घुस आया, जिसे ग्रामीणों ने पकड़कर बेकाबू किया। प्रशासन राहत और बचाव कार्यों में लगातार जुटा हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक नदियों का जलस्तर ऊंचा बना रह सकता है, इसलिए प्रभावित इलाकों में सतर्कता बरतने की जरूरत है।
