भारतीय नौसेना का प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन मालदीव पहुंचा, समुद्री सहयोग को मिलेगा बढ़ावा
भारत-मालदीव समुद्री सहयोग को मजबूत करने के लिए, भारतीय नौसेना का पहला प्रशिक्षण स्क्वाड्रन - जिसमें INS तीर, INS सुजाता और भारतीय तटरक्षक जहाज 'सारथी' शामिल हैं - 21 अक्टूबर 2026 को माले पहुंचा।

माले : भारतीय नौसेना के प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन (1TS) के तीन जहाज लंबी दूरी की प्रशिक्षण तैनाती के तहत 21 अक्टूबर 2026 को मालदीव की राजधानी माले पहुंचे। इस स्क्वाड्रन में भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस तीर और आईएनएस सुजाता के साथ भारतीय तटरक्षक बल का जहाज सारथी शामिल है। मालदीव राष्ट्रीय रक्षा बल (MNDF) ने भारतीय जहाजों का गर्मजोशी से स्वागत किया।
यह यात्रा भारत और मालदीव के बीच मजबूत समुद्री साझेदारी, रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
माले में बंदरगाह पर ठहराव के दौरान प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन के वरिष्ठ अधिकारी ने मालदीव राष्ट्रीय रक्षा बल के रक्षा प्रमुख और तटरक्षक बल के कमांडेंट से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच निरंतर संपर्क बनाए रखने और समुद्री क्षेत्र में सहयोग के विभिन्न पहलुओं को मजबूत करने पर चर्चा हुई।
इसके अलावा, स्क्वाड्रन के वरिष्ठ अधिकारी ने मालदीव में भारत के उच्चायुक्त जी. बालासुब्रमण्यम से भी मुलाकात की। इन बैठकों का उद्देश्य भारत और मालदीव के बीच रक्षा संबंधों तथा समुद्री सहयोग को और अधिक प्रभावी बनाना है।
प्रशिक्षण आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत भारतीय नौसेना के प्रशिक्षुओं ने मालदीव स्थित गिरिफुशी प्रशिक्षण केंद्र का दौरा किया। इस दौरान उन्हें प्रशिक्षण गतिविधियों और दोनों देशों की सैन्य प्रशिक्षण व्यवस्थाओं के बीच आपसी समझ विकसित करने का अवसर मिला।
यात्रा के दौरान दोनों देशों के कर्मियों के बीच एक-दूसरे के जहाजों का दौरा, खेल प्रतियोगिताएं, सामाजिक मेल-मिलाप और जनसंपर्क से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। इन कार्यक्रमों से दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी तालमेल, विश्वास और पेशेवर संबंधों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
भारतीय नौसेना के प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन की यह यात्रा भारत और मालदीव के बीच बेहतर परिचालन तालमेल तथा आपसी समझ को बढ़ावा देने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
यह पहल भारत की ‘महासागर’ परिकल्पना के अनुरूप भी है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास को बढ़ावा देना है। इस यात्रा से दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग, रक्षा संपर्क और हिंद महासागर क्षेत्र में साझेदारी को और मजबूती मिलने का संदेश मिलता है।
भारत और मालदीव के बीच इस तरह के प्रशिक्षण एवं संपर्क कार्यक्रम क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और स्थिरता के लिए सहयोग बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं।


