
नई दिल्ली : शुभ सीता फाउंडेशन द्वारा नई दिल्ली के केदार नाथ साहनी ऑडिटोरियम में आयोजित ‘बिहारी स्वाभिमान सम्मेलन’ में बिहार के वर्तमान और भविष्य को लेकर राजनीति, उद्योग-व्यापार, पत्रकारिता, विज्ञान, शिक्षा, कला, साहित्य, संगीत और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े प्रमुख लोगों ने व्यापक विमर्श किया।
सम्मेलन में देश के चर्चित युवा बिहारी नेता कन्हैया कुमार, वरिष्ठ पत्रकार श्री संतोष सिंह, श्रीकांत प्रत्यूष, लेखक एवं गायक नीलोत्पल मृणाल, वैज्ञानिक एवं उद्यमी प्रो. प्रभात रंजन, अधिवक्ता संजू सिंह , सुधीर झा,मेजर जनरल जीडी बख्शी, विधायक शुभानंद मुकेश सहित राजनीति, पत्रकारिता, कानून, विज्ञान, उद्योग, साहित्य, संगीत और कला क्षेत्र से जुड़े अनेक प्रमुख व्यक्तित्व उपस्थित रहे।
सम्मेलन का उद्देश्य बिहार की राजनीति पर किसी एक दृष्टिकोण को स्थापित करना नहीं, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों के अनुभवों को एक मंच पर लाकर यह समझना था कि अगले 10-15 वर्षों में बिहार किस दिशा में आगे बढ़ सकता है।
सम्मेलन के राजनीतिक सत्र में बिहार की वर्तमान राजनीति और उसके भविष्य को लेकर व्यापक चर्चा हुई।विभिन्न राजनीतिक धाराओं से जुड़े नेताओं के विचारों से यह बात सामने आई कि बिहार की राजनीति पिछले कुछ दशकों में कई महत्वपूर्ण चरणों से गुजरी है। अलग-अलग राजनीतिक नेतृत्व के उभरने के बावजूद बिहार में नए नेतृत्व और नई राजनीतिक सोच के लिए अभी भी पर्याप्त संभावना और स्थान मौजूद है। बिहार के समाज में बदलती आकांक्षाएँ, युवा आबादी और नए सामाजिक समूह आने वाले समय में नए नेतृत्व और नई राजनीतिक धाराओं के लिए जगह बना सकते हैं।
व्यापार और उद्योग से जुड़े वक्ताओं के विमर्श में बिहार में निवेश और आर्थिक विकास की संभावनाओं पर चर्चा हुई।उद्योग जगत से जुड़े लोगों ने इस बात पर जोर दिया कि निवेश के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक स्थिरता के साथ-साथ निवेशकों का भरोसा भी जरूरी है।विमर्श में यह बात सामने आई कि बिहार में राजनीतिक स्थिरता और विकास की संभावनाओं के बावजूद राज्य को लेकर बाहर चलने वाली धारणाएँ निवेश के फैसलों को प्रभावित करती हैं। इसलिए बिहार के लिए केवल स्थिर सरकार होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्थिरता, नीति की निरंतरता, कानून-व्यवस्था, भूमि, आधारभूत ढाँचा और प्रशासनिक भरोसे को भी निवेश की दृष्टि से मजबूत करना होगा।
विमर्श में यह बात सामने आई कि बिहार के युवाओं में प्रतिभा की कमी नहीं है। बड़ी संख्या में बिहार के युवा देश और दुनिया के प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी पहचान बना रहे हैं। चुनौती यह है कि बिहार में ऐसा शैक्षणिक, वैज्ञानिक और आर्थिक वातावरण कैसे तैयार किया जाए, जिसमें बाहर जाने वाला युवा भविष्य में बिहार लौटकर भी काम और अवसर देख सके।
साहित्य, सिनेमा, संगीत और कला से जुड़े सत्र में बिहार की सांस्कृतिक विरासत और उसके भविष्य पर चर्चा हुई।कलाकारों और संगीत से जुड़े लोगों के विमर्श से यह बात सामने आई कि बिहार की लोकसंस्कृति, लोकभाषाओं और लोकसंगीत में बहुत बड़ी संभावनाएँ मौजूद हैं, जिनका अभी पूरी तरह उपयोग नहीं हुआ है।देश के दूसरे राज्यों की लोकसंस्कृतियों पर आधारित संगीत और सिनेमा ने जिस तरह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार बनाया है, उसी तरह बिहार की मैथिली, भोजपुरी, मगही, बज्जिका और अन्य लोक परंपराओं को आधुनिक माध्यमों से बड़े दर्शक वर्ग तक पहुँचाने की व्यापक संभावना है।
पत्रकारों ने इस बात पर विचार रखा कि बिहार को केवल चुनाव, राजनीतिक बयान और तत्काल घटनाओं के माध्यम से देखने के बजाय शिक्षा, रोजगार, प्रवासन, सामाजिक बदलाव, प्रशासन और बदलती जन आकांक्षाओं के व्यापक संदर्भ में समझने की जरूरत है।
सत्र में उन मौलिक सवालों पर भी चर्चा हुई जो अक्सर रोजमर्रा की राजनीतिक खबरों के शोर में पीछे छूट जाते हैं। सम्मेलन में महिलाओं की राजनीतिक और सामाजिक भागीदारी पर भी चर्चा हुई।विमर्श में यह बात सामने आई कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ने के बावजूद राजनीतिक नेतृत्व, निर्णय लेने की प्रक्रिया और सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की प्रभावी भागीदारी को अभी और मजबूत किए जाने की जरूरत है।
‘बिहारी स्वाभिमान सम्मेलन’ का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह रहा कि बिहार का भविष्य केवल सरकार या राजनीतिक दलों के निर्णयों से तय नहीं होगा। राजनीति, उद्योग, शिक्षा, विज्ञान, पत्रकारिता, कला, संस्कृति और नागरिक समाज—इन सभी क्षेत्रों की अपनी भूमिका है। सम्मेलन में इस बात पर जोर रहा कि बिहार के बाहर रहने वाले बिहारी भी राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भागीदार बन सकते हैं। देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में काम कर रहे बिहार के लोगों के अनुभव, पूंजी, ज्ञान, तकनीक और संपर्कों को बिहार के विकास से जोड़ने की आवश्यकता है। आयोजन के दौरान सुप्रसिद्ध गायक नीलोत्पल मृणाल, प्रिया मल्लिक की गायकी ने भरपूर समाँ बाँधा।
शुभ सीता फाउंडेशन की संस्थापिका एवं सम्मेलन की सूत्रधार श्रीमती मनोरमा झा ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य बिहार के बारे में केवल चर्चा करना नहीं, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों को एक मंच पर लाकर ऐसे संवाद को आगे बढ़ाना है जो बिहार के अगले दशक की दिशा पर गंभीर विचार कर सके।‘बिहारी स्वाभिमान सम्मेलन’ ने इसी व्यापक संवाद को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में अपनी भूमिका दर्ज की। सम्मेलन के कन्वीनर रोहन ने अपनी जमीनी सक्रियता से विभिन्न सामाजिक संगठनों, युवाओं तथा अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यरत प्रोफेशनल्स को इस मंच से जोड़ा।

