उन्नावउत्तर प्रदेश

उन्नाव कोतवाली से 500 मीटर दूर कार बनी आग का गोला, 45 मिनट बाद पहुंची पुलिस-फायर ब्रिगेड! सरकारी तंत्र पर बड़ा सवाल

उन्नाव ब्यूरो(संतोष अवस्थी की रिपोर्ट): शहर की कानून-व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं की पोल उस समय खुल गई जब सदर कोतवाली से मात्र 500 से 700 मीटर की दूरी पर एक कार में भीषण आग लग गई और पूरी गाड़ी जलकर खाक हो गई, लेकिन पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम लगभग 45 मिनट बाद मौके पर पहुंची। हैरानी की बात यह है कि जिस स्थान पर आग लगी, वहां से कोतवाली चंद कदमों की दूरी पर है, फिर भी जिम्मेदार विभाग तमाशबीन बना रहा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार में अचानक आग भड़क उठी और देखते ही देखते आग ने पूरी गाड़ी को अपनी चपेट में ले लिया। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। पास की बर्तन दुकान के दुकानदार ने बताया कि जैसे ही आग की शुरुआत हुई, उन्होंने तुरंत फायर ब्रिगेड को फोन किया, लेकिन काफी देर तक फोन पर जद्दोजहद चलती रही। बार-बार सूचना देने के बावजूद लगभग 45 मिनट बाद फायर ब्रिगेड की गाड़ी मौके पर पहुंची। तब तक कार पूरी तरह जल चुकी थी।


दुकानदार का आरोप है कि फायर ब्रिगेड और पुलिस मौके पर पहुंचने के बाद भी राहत देने के बजाय उन्हीं से गलत तरीके से बातचीत की गई। यह व्यवहार स्थानीय लोगों के गुस्से को और बढ़ाने वाला था। लोगों का कहना है कि जब कोतवाली के पास ही यह हाल है, तो पूरे शहर की सुरक्षा का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सदर कोतवाली लगभग 500 मीटर और अग्निशमन विभाग लगभग 700 मीटर की दूरी पर है, तो आखिर 45 मिनट का इंतजार क्यों? क्या पुलिस सिर्फ कागजों में गश्त करती है? क्या जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ दी गई है?
सदर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक और पुरवा क्षेत्र से आए फायर ब्रिगेड प्रभारी राममिलन जी दोनों की कार्यशैली पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अगर यही आग किसी मकान, दुकान या भीड़भाड़ वाले इलाके में लगती और कोई बड़ी जनहानि हो जाती, तो उसका जिम्मेदार कौन होता?

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स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि जब प्रशासन कोतवाली के बगल में लगी आग पर समय से नहीं पहुंच सकता, तो बाकी शहर की सुरक्षा की उम्मीद करना भी बेकार है। अब जनता जवाब मांग रही है—क्या कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी सिर्फ खबर बनकर रह जाएगा?

Prashant Tiwari

प्रशांत तिवारी एक अनुभवी ब्रॉडकास्ट जर्नलिस्ट, क्राइम इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टर और डिजिटल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट हैं। उन्होंने डीडी न्यूज़ (दूरदर्शन) में बतौर डिजिटल हेड की सेवाएं दीं और प्राइम टीवी में डिजिटल मार्केटिंग मैनेजर के रूप में न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स की डिजिटल ग्रोथ, ऑडियंस एंगेजमेंट और मल्टी-प्लेटफॉर्म मीडिया स्ट्रैटेजी पर महत्वपूर्ण काम किया। क्राइम इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के तौर पर उन्होंने कई न्यूज़ चैनलों के लिए अंडरकवर/स्पाई-स्टाइल रिपोर्टिंग, स्टिंग ऑपरेशन और फील्ड इन्वेस्टिगेशन किए। संगठित अपराध, साइबर क्राइम, ड्रग्स सिंडिकेट, मानव एवं गौवंश तस्करी और फर्जीवाड़े जैसे विषयों पर उनकी इन्वेस्टिगेशन चर्चित रहीं। कई संवेदनशील मामलों में उन्होंने क्षेत्रीय पुलिस को जरूरी इनपुट व सहयोग उपलब्ध कराया।

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