भारत-जापान रक्षा सहयोग को मिलेगी नई मजबूती, राजनाथ सिंह और शिंजिरो कोइज़ुमी ने सेबू में की अहम बैठक
भारत-जापान रक्षा संबंधों, समुद्री सुरक्षा, नौसैनिक सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता को मजबूत करने के लिए राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिनजिरो कोइज़ुमी ने सेबू में मुलाकात की।

सेबू/नई दिल्ली : भारत और जापान ने अपनी विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी ने 28 अक्टूबर 2026 को फिलीपींस के सेबू में आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक (ADMM-Plus) के अवसर पर मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में हुई प्रगति की समीक्षा की और भविष्य में सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा की।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, दोनों मंत्रियों ने अगस्त 2026 में हुई पिछली बैठक के बाद रक्षा सहयोग में निरंतर प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। बातचीत में समुद्री सुरक्षा, नौसैनिक पोतों के डिजाइन एवं निर्माण, वायुसेना सहयोग और रक्षा उद्योग के क्षेत्र में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक के दौरान भारत और जापान ने अपनी रणनीतिक तथा परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप ठोस समुद्री सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। इसमें समुद्री बारूदी सुरंगों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने से जुड़ी क्षमताओं को मजबूत करने के साथ-साथ नौसैनिक पोतों के डिजाइन एवं निर्माण में संयुक्त विकास की संभावनाओं का पता लगाना शामिल रहा।
इस क्षेत्र में जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की उत्पादन क्षमताओं का लाभ उठाने पर विचार किया गया। दोनों देशों का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी क्षमताओं को मजबूत करना है।
भारतीय नौसेना के उप प्रमुख की जापान यात्रा जैसे उच्चस्तरीय संपर्कों ने भी इस सहयोग को आगे बढ़ाने में योगदान दिया है।
भारत और जापान के बीच वायुसेना सहयोग को मजबूत करने के प्रयासों पर भी बैठक में चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच आयोजित वायुसेना अभ्यास ‘वीर गार्डियन 26’ के दौरान जापान के वायु आत्मरक्षा बल के लड़ाकू विमानों ने पहली बार भारत का दौरा किया था।
इस अभ्यास ने दोनों देशों की वायुसेनाओं के बीच परिचालन समन्वय और आपसी समझ को बढ़ाने का अवसर प्रदान किया। इसी क्रम में जापान के वायु आत्मरक्षा बल के प्रमुख की भारत यात्रा भी महत्वपूर्ण रही।
दोनों पक्षों ने रक्षा सहयोग के इस क्षेत्र में हुई प्रगति को आगे बढ़ाने और आपसी सैन्य संपर्कों को मजबूत करने पर सहमति जताई।
रक्षा औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए टोक्यो स्थित भारतीय दूतावास में भारत-जापान रक्षा उद्योग मंच का सफल आयोजन किया गया। इसमें दोनों देशों की लगभग 40 कंपनियों ने भाग लिया।
यह मंच भारतीय और जापानी रक्षा कंपनियों के बीच संवाद, तकनीकी सहयोग तथा औद्योगिक साझेदारी की संभावनाओं को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ। इससे रक्षा उत्पादन, तकनीकी नवाचार और संयुक्त विकास के क्षेत्रों में नए अवसर तलाशने का रास्ता खुल सकता है।
भारत अपनी घरेलू रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ मित्र देशों की उन्नत तकनीकों और विशेषज्ञता से लाभ उठाने पर जोर दे रहा है।
बैठक के दौरान दोनों रक्षा मंत्रियों ने इस वर्ष के उत्तरार्ध में टोक्यो में चौथी जापान-भारत विदेश एवं रक्षा मंत्री स्तरीय बैठक (2+2) और जापान-भारत रक्षा मंत्रियों की बैठक आयोजित करने की दिशा में चर्चाओं में तेजी लाने पर सहमति व्यक्त की।
प्रस्तावित बैठकों में द्विपक्षीय रक्षा संबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर आगे विचार-विमर्श होने की उम्मीद है।
बैठक के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि जापान के रक्षा मंत्री के साथ बातचीत में भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने के नए अवसरों पर विचार किया गया।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्र, मुक्त और शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए भारत और जापान की साझा प्रतिबद्धता अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और रक्षा सहयोग का महत्व लगातार बढ़ रहा है। भारत और जापान के बीच बढ़ता सैन्य एवं औद्योगिक सहयोग दोनों देशों की दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकता है।


