भारत के आत्मनिर्भर रक्षा इकोसिस्टम को मिलेगी वैश्विक पहचान, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने किया VISV-2026 का उद्घाटन
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने दिल्ली में VISV-2026 का उद्घाटन किया। DRDO ने वैश्विक रक्षा साझेदारी, स्वदेशी तकनीक और रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

नई दिल्ली : भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने की दिशा में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने 30 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में VISV-2026 (विजन, इनोवेशन, सिनर्जी एंड वैल्यू) का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम का आयोजन DRDO ने सेंटर फॉर जॉइंट वारफेयर स्टडीज (CENJOWS) के सहयोग से किया।
‘रक्षा क्षमताओं का प्रदर्शन, वैश्विक साझेदारियों को मजबूती’ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीकों, अनुसंधान और विनिर्माण क्षमताओं को अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के सामने प्रस्तुत करना तथा रक्षा सहयोग के नए अवसर तलाशना है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि VISV के चार प्रमुख स्तंभ- विजन, नवाचार, समन्वय और मूल्य भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का विस्तार करने के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत हैं। उन्होंने बताया कि विजन भविष्य की रक्षा आवश्यकताओं को समझने, नवाचार अनुसंधान को प्रभावी तकनीकों में बदलने, समन्वय सशस्त्र बलों, अनुसंधान संस्थानों और उद्योगों को एक मंच पर लाने तथा मूल्य आपसी विश्वास, सम्मान और जिम्मेदारी के आधार पर साझेदारी को मजबूत करने का काम करता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ‘विकसित भारत@2047’ के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। इस दिशा में तकनीकी रूप से उन्नत और आत्मनिर्भर रक्षा इकोसिस्टम का निर्माण बेहद महत्वपूर्ण है।
रक्षा राज्य मंत्री ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत स्वदेशी अनुसंधान, डिजाइन, विकास और विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी आत्मनिर्भरता से भारत अंतरराष्ट्रीय रक्षा साझेदारियों में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेगा।
संजय सेठ ने उभरती रक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए अनुसंधान और तकनीकी नवाचार को प्रभावी रक्षा समाधानों में बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने स्वदेशी रक्षा क्षमताओं के विकास में DRDO के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और भारतीय उद्योग जगत के योगदान की सराहना की। इस अवसर पर रक्षा राज्य मंत्री ने DRDO के उत्पादों से संबंधित विदेशी भाषा संकलन पुस्तिका भी जारी की। यह पुस्तिका अरबी, स्पेनिश और फ्रेंच भाषाओं में तैयार की गई है।
इस पहल का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय साझेदार देशों को भारत के रक्षा उत्पादों और तकनीकी समाधानों की जानकारी उपलब्ध कराना तथा उनके साथ संवाद और सहयोग को आसान बनाना है।
रक्षा सचिव एवं रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग के सचिव तथा DRDO अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने भारत की रक्षा तैयारियों को मजबूत बनाने में तकनीकी क्षमता और संस्थागत साझेदारियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। वहीं रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार ने भारत की तेजी से बढ़ती रक्षा विनिर्माण क्षमताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि अब पारंपरिक खरीदार-विक्रेता संबंधों से आगे बढ़कर संयुक्त विकास, सह-उत्पादन और विनिर्माण साझेदारियों पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि बेंगलुरु में आयोजित होने वाले एयरो इंडिया 2027 के लिए अंतरराष्ट्रीय समकक्षों को उच्चस्तरीय औपचारिक निमंत्रण भेजे जा रहे हैं। यह आयोजन भारत की बढ़ती एयरोस्पेस और रक्षा क्षमताओं को प्रदर्शित करने के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने का अवसर होगा।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बदलते भू-राजनीतिक और तकनीकी परिदृश्य में रक्षा कूटनीति के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने रणनीतिक स्वायत्तता, बहु-संरेखण, आपसी विश्वास और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में रक्षा साझेदारियों को मजबूत करने के लिए विश्वास और साझा हितों पर आधारित सहयोग आवश्यक है।
VISV-2026 में ‘संयुक्त सहयोग और साझेदारी के अवसर’ विषय पर एक विशेष संवादात्मक सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें रक्षा उत्पादन विभाग, DRDO, सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM), भारतीय रक्षा उद्योग और विभिन्न देशों के रक्षा अताशे के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
चर्चा के दौरान रक्षा निर्यात, तकनीकी आदान-प्रदान, उत्पादों के अनुकूलन, संयुक्त अनुसंधान एवं विकास, सह-विकास, सह-उत्पादन और औद्योगिक सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। इस मंच के माध्यम से मित्र देशों की रक्षा जरूरतों को समझने और भारतीय रक्षा उद्योग के साथ संभावित साझेदारियां विकसित करने के अवसरों पर भी चर्चा हुई।
VISV-2026 में रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ, तीनों सेनाओं, DRDO, SIDM, शिक्षण संस्थानों और भारतीय रक्षा उद्योग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मित्र देशों के रक्षा अताशे एवं विदेशी राजनयिक मिशनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इस आयोजन ने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को भारत की स्वदेशी रक्षा अनुसंधान, विकास और उत्पादन क्षमताओं से परिचित होने का अवसर प्रदान किया।
कार्यक्रम के माध्यम से भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि देश का लक्ष्य केवल रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनना नहीं, बल्कि विश्वसनीय तकनीकी समाधान उपलब्ध कराकर वैश्विक रक्षा सहयोग में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाना है। आत्मनिर्भर रक्षा इकोसिस्टम के विकास के साथ भारत मित्र देशों के साथ दीर्घकालिक और पारस्परिक लाभकारी साझेदारियों को भी नई मजबूती देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।




