देशताज़ा खबरें

स्वतंत्रता दिवस 2026 पर नरेश कुमार कुमावत की कला में दिखा राष्ट्रनायकों का गौरव

लेख: अमरेश द्विवेदी
नई दिल्ली।
स्वतंत्रता दिवस 2026 के मौके पर प्रसिद्ध मूर्तिकार नरेश कुमार कुमावत अपनी कला के जरिए देश के राष्ट्रनायकों और भारत की गौरवशाली विरासत को नमन कर रहे हैं। कांस्य, धातु और पत्थर में तैयार उनकी कलाकृतियां भारत के इतिहास, लोकतांत्रिक मूल्यों और सांस्कृतिक पहचान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम कर रही हैं। कुमावत की कई प्रमुख कृतियां भारत के महत्वपूर्ण संस्थानों के अलावा दुनिया के अलग-अलग देशों में भी स्थापित हैं।

नरेश कुमार कुमावत का नाम नई संसद भवन में बनाई गई कलाकृतियों को लेकर भी चर्चा में रहा है। उनके काम में संसद भवन के भीतर तैयार किया गया विशाल ‘समुद्र मंथन’ भित्तिचित्र प्रमुख है। यह करीब 75 फीट लंबा और नौ फीट ऊंचा बताया गया है तथा इसमें 235 दिव्य आकृतियों को दर्शाया गया है। इसे तैयार करने में करीब 40 कारीगरों की टीम ने लगभग 10 महीने काम किया।

कुमावत की कला का दायरा केवल भारत तक सीमित नहीं है। भारत सरकार के सिएटल स्थित महावाणिज्य दूतावास के अनुसार, उनकी 600 से अधिक कलाकृतियां 80 से ज्यादा देशों में स्थापित हैं। इनमें महात्मा गांधी, डॉ. बीआर आंबेडकर, स्वामी विवेकानंद, रवींद्रनाथ टैगोर और भगवान बुद्ध जैसी प्रमुख हस्तियों से जुड़ी प्रतिमाएं शामिल हैं। उनकी कलाकृतियां विदेशों में भारत की सांस्कृतिक पहचान को सामने रखने का माध्यम बनी हैं।

यह भी पढ़ें  Ind vs Eng U19 Final: भारत बना छठी बार वर्ल्ड चैंपियन! वैभव सूर्यवंशी के तूफान में उड़ा इंग्लैंड, 100 रनों से मिली ऐतिहासिक जीत

हाल के वर्षों में उनकी कला की अंतरराष्ट्रीय पहुंच का एक उदाहरण अमेरिका के सिएटल में भी देखने को मिला। अप्रैल 2026 में सिएटल के वेस्टलेक स्क्वायर में स्वामी विवेकानंद की आदमकद कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया गया। यह प्रतिमा नरेश कुमार कुमावत ने तैयार की थी। भारत के महावाणिज्य दूतावास के मुताबिक, सिएटल में स्थापित यह प्रतिमा किसी अमेरिकी शहर की सरकार द्वारा आयोजित पहली लाइफ-साइज स्वामी विवेकानंद प्रतिमा स्थापना है।

कुमावत की कला में राष्ट्रनायकों को केवल प्रतिमा के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय उनके विचारों और योगदान को सामने रखने पर भी जोर दिखाई देता है। संसद से जुड़े उनके कार्यों में सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. बीआर आंबेडकर की कलाकृतियां भी शामिल हैं। इनके जरिए राष्ट्रीय एकता, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों जैसे विषयों को रेखांकित किया गया है।

स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर कुमावत ने स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्रनायकों को याद करते हुए कहा कि उन्हें मूर्त रूप देना केवल कला का काम नहीं, बल्कि इतिहास के साथ संवाद करने का माध्यम है। उनके मुताबिक, ऐसे स्मारक आने वाली पीढ़ियों को देश के निर्माण में योगदान देने वाले महान व्यक्तित्वों के संघर्ष और उपलब्धियों से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

यह भी पढ़ें  लखनऊ में नेशनल ज्वेलर्स मीट 2026 आयोजित, एडीसीपी बोले- पुलिस व्यापारियों की मदद के लिए हमेशा तैयार

मूर्तिकार का काम पारंपरिक शिल्प और आधुनिक तकनीक के मेल का भी उदाहरण है। उनके स्टूडियो में डिजिटल मॉडलिंग, 3D स्कैनिंग और आधुनिक निर्माण तकनीकों का इस्तेमाल पारंपरिक मूर्तिकला के साथ किया जाता है। इससे बड़े आकार की प्रतिमाओं और जटिल कलाकृतियों को तैयार करने की प्रक्रिया में तकनीकी सटीकता बढ़ती है।

राजस्थान के पिलानी से आने वाले कुमावत का परिवार कई पीढ़ियों से मूर्तिकला से जुड़ा रहा है। उन्होंने इस पारंपरिक विरासत को आधुनिक तकनीक और बड़े सार्वजनिक प्रोजेक्ट्स के साथ आगे बढ़ाया है। उनकी कलाकृतियां भारत के अलग-अलग हिस्सों से लेकर अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्थलों तक पहुंच चुकी हैं।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रनायकों को कला के माध्यम से याद करने की यह पहल भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास भी है। संसद भवन से लेकर विदेशों के सार्वजनिक स्थलों तक स्थापित कुमावत की कलाकृतियां भारतीय इतिहास और विचारों को मूर्त रूप में सामने रखती हैं। ऐसे में नरेश कुमार कुमावत की मूर्तिकला स्वतंत्रता दिवस 2026 के दौरान देशभक्ति और राष्ट्रीय विरासत से जुड़े विमर्श का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर सामने आती है।

Prashant Tiwari

प्रशांत तिवारी एक अनुभवी ब्रॉडकास्ट जर्नलिस्ट, क्राइम इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टर और डिजिटल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट हैं। उन्होंने डीडी न्यूज़ (दूरदर्शन) में बतौर डिजिटल हेड की सेवाएं दीं और प्राइम टीवी में डिजिटल मार्केटिंग मैनेजर के रूप में न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स की डिजिटल ग्रोथ, ऑडियंस एंगेजमेंट और मल्टी-प्लेटफॉर्म मीडिया स्ट्रैटेजी पर महत्वपूर्ण काम किया। क्राइम इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के तौर पर उन्होंने कई न्यूज़ चैनलों के लिए अंडरकवर/स्पाई-स्टाइल रिपोर्टिंग, स्टिंग ऑपरेशन और फील्ड इन्वेस्टिगेशन किए। संगठित अपराध, साइबर क्राइम, ड्रग्स सिंडिकेट, मानव एवं गौवंश तस्करी और फर्जीवाड़े जैसे विषयों पर उनकी इन्वेस्टिगेशन चर्चित रहीं। कई संवेदनशील मामलों में उन्होंने क्षेत्रीय पुलिस को जरूरी इनपुट व सहयोग उपलब्ध कराया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button